नौ साल से मुआवजे के लिए अदालत में धक्का खा रही लड़की को राष्ट्रीय लोक अदालत में इंसाफ मिल गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसकेअग्रवाल की अदालत ने लड़की को चार लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
लड़की का सड़क हादसे में एक कान कट गया था। जिला अदालत में लगाई गई राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को 34 हजार 750 मामलों का निपटारा किया गया।
इसका आयोजन स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस हेमंत गुप्ता व सत्र इकाई के प्रशासनिक जज जस्टिस राजन गुप्ता के मार्गदर्शन से किया गया।
34 हजार 750 मामलों का निपटारा
लोक अदालत में कुल 21 बेंच लगाए गए। लोक अदालत में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से आए जस्टिस ने मौकेपर कई केसों का निपटारा किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में 34 हजार 750 मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में मोटर एक्सीडेंट क्लेम, हिंदू मैरिज एक्ट, रेंट केस, सिविल केस, अपील, क्रिमिनल केस, बैंक केस, ट्रैफिक चालान आदि शामिल किए गए।
चैक बाउंस के 608 केसों को हल करते हुए चार करोड़ 12 लाख 81 हजार 217 रुपये का निपटारा किया गया। मोटर एक्सीडेंट क्लेम के रूप में 36 लाख 20 हजार रुपये लोगों को दिलवाए गए।
हिंदू मैरिज एक्ट, रेंट केस, अपील आदि के कुल 2752 केसों में तीन करोड़ 29 लाख 14 हजार 349 रुपये लोगों को दिलवाए गए। 431 एग्जीक्यूशन पिटीशन्स पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 11 करोड़ 74 लाख 36 हजार 309 रुपये क्लेमेंट्स को दिलवाए।
209 लेबर केसों का निपटारा कर 44 लाख 79 हजार 888 लोगाें को दिए गए। इनके अलावा लोक अदालत में 30,183 ट्रैफिक चालानों का निपटारा करते हुए एक करोड़ 85 लाख 87 हजार 600 रुपए इकट्ठे किए गए।
इस मौके पर जिला एंव सत्र न्यायाधीश एसके अग्रवाल ने आम लोगों से अपील भी की। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोग राष्ट्रीय लोक अदालतों का फायदा उठाएं, ताकि वह अपने कीमती समय को बचा शीघ्र तथा उचित न्याय ले सकें।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक चौहान समेत वकीलों ने भी सहयोग दिया।
20 साल पुराने केस का हुआ समझौता
राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को बतरा थ्रियेटर केमालिकों के बीच चल रहे प्रॉपर्टी के बीस साल पुराने मामले में समझौता हो गया।
मालिकों के बीच आपस में कोर्ट केस चल रहे थे। अदालत ने बताया कि मालिकों के बीच करीब 60 केस अलग-अलग अदालतों में चल रहे है। राष्ट्रीय लोक अदालत में सामने बैठाकर समझौता करवाया गया।