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बच्चे के गले में फंसी गेंद, इलाज के लिए सात अस्पताल भटकी मां, बच्चे के बाद सदमे में नाना की मौत

Thu, 04 Oct 2018 12:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो
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सात माह के बच्चे के गले में पौन इंच की रबड़ की गेंद फंस गई। बच्चे की मां ने 45 मिनट तक शहर के सात निजी अस्पतालों में इलाज की गुहार लगाई, लेकिन कहीं भी उपचार नहीं मिला और मासूम की मौत हो गई। मां बच्चे का शव लेकर घर पहुंची तो सदमे में हार्ट अटैक से बच्चे के चचेरे नाना की मौत हो गई। पुरेवाल कॉलोनी निवासी बच्चे के चचेरे नाना सुरेंद्र ने बताया कि उनकी भतीजी कविता की शादी मालपुर निवासी बिजेंद्र से हुई है। 

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कविता के पिता की चार साल पहले मौत हो चुकी है। कविता अपने चाचा जोगिंद्र (48) के घर दादी ईश्वरी की देखभाल करने के लिए आई हुई है। बुधवार सुबह कविता ने अपने सात माह के बच्चे मोहित को नहलाने के बाद कपड़े पहनाकर फर्श पर खेलने के लिए छोड़ दिया। वह दादी को दवाई देने के लिए चली गई। इसी बीच गली में खेल रहे बच्चों के पास से एक छोटी बॉल मोहित के पास आ गई। 

मोहित ने उसे मुंह में डाल लिया, जो उसके गले में फंस गई। 
बॉल गले में फंसने के बाद मोहित फर्श पर उल्टा लेट गया। उसके गले से आवाज नहीं निकल रही थी। वह दर्द से तड़पने लगा। उसकी हालत देखकर कविता रोने लगी। परिवार और पड़ोस के लोगों ने गेंद निकालने का प्रयास किया, लेकिन विफल रहे। इसके बाद कविता मोहित को अस्पताल लेकर भागी। करीब 45 मिनट तक कविता अपने मासूम बच्चे को लेकर शहर के सात निजी अस्पतालों में गई, लेकिन किसी ने भी मोहित का इलाज नहीं किया।
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 कहीं डाक्टर नहीं मिला तो कहीं सर्जन। कहीं इंडोस्कोपी की सुविधा नहीं थी। परिजनों का आरोप है कि 24 घंटे बीमारी का इलाज करने का दावा करने वाले सात निजी अस्पतालों की लापरवाही की वजह से सात माह के मासूम की जान चली गई। उसकी मौत के सदमे में उसके नाना की भी मौत हो गई।

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