पंचकूला में एक ही परिवार के 7 सदस्यों ने आत्महत्या की घटना से हर कोई स्तब्ध है। जहर खाकर मरने वालों में प्रवीन मित्तल, उसकी पत्नी रीना, बुजुर्ग मां विमला, पिता देशराज, 11 साल की जुड़वां बेटियां हिमशिखा व डलिशा और 14 साल का बेटा हार्दिक भी था। सभी के शव पंचकूला के सेक्टर-27 में कार में मिले थे।
प्रवीन मित्तल परिवार के साथ पंचकूला के सकेतड़ी में रहता था और उनके बेटे चंडीगढ़ के सरकारी मॉडल स्कूल में पढ़ते थे। बेटा सेक्टर-28 तो दोनों बेटियां सेक्टर 22 के सरकारी मॉडल स्कूल में पढ़ती थीं। बेटा हार्दिक मित्तल 9वीं और दोनों बेटियां छठी कक्षा में पढ़ती थी।
प्रवीन मित्तल का बेटा हार्दिक सेक्टर-28 सरकारी मॉडल स्कूल का 9वीं का छात्र था। कक्षा 9 सी के इंचार्ज मुकेश ने बताया कि 28 अप्रैल को हार्दिक मित्तल का उनके स्कूल में दाखिला हुआ था। 28 अप्रैल से 22 मई तक यह बच्चा स्कूल रोजाना आता था। कभी इसकी कोई शिकायत नहीं आई और एक दिन भी गैर हाजिर नहीं रहा।
इंचार्ज मुकेश ने बताया कि बच्चे के माता-पिता से भी दाखिले को लेकर बात हुई थी, वह किसी तरीके से तनाव में नहीं लगे। जब उनसे पूछा कि बच्चा पहले कहां था तो उन्होंने बताया कि सेक्टर-38 के स्कूल में था, लेकिन अब वह इधर शिफ्ट हो गए हैं इसलिए बेटे का दाखिला इसी स्कूल में करवाया है। स्कूल में सीट न होने के बावजूद भी बच्चे को दाखिला दिया गया था। एक महीने वह स्कूल में रहा, उसने टेस्ट दिए। बच्चे के माता-पिता 22 मई को पीटीएम में भी स्कूल में आए थे। दो बार उनकी बच्चों के पिता से 15-15 मिनट बात हुई, लेकिन हर बार उन्होंने अच्छा व्यवहार किया।
मैथ में ध्रुविका और दलिशा मित्तल ने लिए थे अच्छे अंक
वहीं, सेक्टर-22 के सरकारी मॉडल स्कूल में ध्रुविका और दलिशा मित्तल 6वीं कक्षा की छात्राएं थी। एक महीने से ही वह स्कूल में आ रही थी। टीचरों ने बताया कि बच्चियों का पिछला रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। दोनों पढ़ने में अच्छी थी। उन्होंने कहा कि पूरे 1 महीने में उनकी कोई भी गैर हाजिरी नहीं है। यूनिट टेस्ट में भी उन्होंने अच्छे अंक हासिल किए थे। मैथ सब्जेक्ट में दोंनो के अच्छे अंक थे। टीचरों ने कहा कि उनके पिता भी 22 मई को स्कूल में आए थे, उन्होंने टीचरों से पूछा था कि बच्चियों का मन स्कूल में लग गया है या नहीं। टीचरों ने बताया कि पिता को देखकर बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वह किसी तनाव में है। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चियों का इस तरीके से चले जाना बहुत दुखद है।