हरियाणा में 50 हजार करोड़ का वैट रिफंड का घोटाला उजागर हो सकता है। फिलहाल 10 हजार करोड़ से अधिक के घोटाले की पुष्टि हुई है। मामले की जांच चल रही है। बुधवार को लोकायुक्त की ओर से सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंपे जाने पर शिकायतकर्ता कैथल निवासी सतबीर सिंह किच्छाना ने राहत की सांस ली है।
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उनका कहना है कि यदि इस तरह से पूरे देश में जांच की जाए तो यह कोयला घोटाले से भी बड़ा घोटाला हो सकता है। यदि विस्तृत जांच की जाए तो यह 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का गोलमाल है। उसने सीएजी को इस बारे में शिकायत भेजी है।
सतबीर सिंह ने बताया कि उसने वर्ष 2011 उसने लोकायुक्त को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वैट रिफंड के अलावा ट्रांसपोटर्स एवं आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी की शिकायत की थी। उनके आदेश पर गठित एसआईटी ने विस्तृत जांच की।
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फिलहाल 10 हजारा करोड़ के घोटाले की पुष्टि
एसआईटी ने जनवरी में लोकायुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें प्रदेश भर में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ। इस मामले में बुधवार को लोकायुक्त ने अंतरिम फैसला लेते हुए सरकार को अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनेकी सिफारिश की है।
सतबीर किच्छाना ने अमर उजाला को बताया कि हरियाणा में टैक्स चोर माफिया, भ्रष्ट अधिकारी, भ्रष्ट ट्रांसपोर्टर एवं इन सभी टैक्स चोरों को सरंक्षण देने वाले कई भ्रष्ट नेताओं की वजह से हर रोज सरकार को 5 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा है।
इस गोरख धंधे में टैक्स चोरी के अलावा फर्जी कागजातों के आधार पर करोड़ों रुपये की राशि सरकार से वैट टैक्स रिफंड के माध्यम से हड़पी जा रही है।
आरोपी अधिकारियों पर लोकायुक्त ने कसा शिकंजा
हरियाणा के चर्चित वैट रिफंड घोटाले में आखिरकार लोकायुक्त ने आरोपी अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है। लोकायुक्त की अदालत में बुधवार को 10,618 करोड़ रुपये के वैट घोटाले के मामले की सुनवाई हुई।
लोकायुक्त ने एसआईटी की रिपोर्ट पर अंतरिम फैसला सुनाते हुए आरोपी अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय जांच बल्कि आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश प्रदेश सरकार से की है।
इसके अलावा लोकायुक्त ने वैट घोटाले में शामिल व्यापारियों व ट्रांसपोर्टरों पर कार्रवाई करने और वैट की वसूली करने की सिफारिश भी की है। यह लोकायुक्त की अंतरिम सिफारिश है।
इस मामले में अंतिम सुनवाई आठ अप्रैल को होगी। लोकायुक्त की सिफारिश के बाद घोटाले में संलिप्त अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।
किच्छाना ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित अनेकों राज्यों से लोहा, पत्थर, चावल इधर-उधर जाता है। उदहारण के लिए कैथल से फर्जी खरीद का बिल दिखाकर सरकार को टैक्स भरा हुआ दिखाकर करोड़ों रुपये का रिफंड करवा लिया जाता है।
इसमें विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता रहती है। कैथल की केवल 25 फाइलों की जांच में 100 करोड़ का मामला उजागर हो सकता है तो यहां ऐसी करीब 1000 फाइलें हैं।
अब तक दो बार हो चुकी जांच वैट रिफंड घोटाले में 2011 से अब तक दो बार जांच हो चुकी है। नई जांच में लोकायुक्त के आदेश पर आईपीएस अधिकारी श्रीकांत जाधव की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद जिन अधिकारियों का दामन पाक-साफ बताया गया था, उन पर भी उंगलियां उठी थीं।
प्रावधान के मुताबिक करेंगे कार्रवाई: खट्टर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकायुक्त का फैसला आने के बाद वे इस बारे में विचार करेंगे। यह पूछे जाने पर कि सरकार घोटाले की राशि के रिफंड के लिए क्या कदम उठाएगी, खट्टर ने कहा कि हर चीज का प्रावधान होता है। सरकार उसके मुताबिक कार्रवाई करेगी।