रजनी का शव बरामद करने के लिए पुलिस ने की छापेमारी
- सेक्टर-24, घग्गर और मोरनी के रास्ते में की तलाशी
- तीनों आरोपियों ने शव के बारे में नहीं किया अब तक खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
रजनी की हत्या की गुत्थी सुलझ नहीं रही है। इस मामले में अब तक गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने पूछताछ में शव की बरामदगी के लिए जानकारी देने की बजाय गुमराह किया है। पुलिस भी लगातार इस प्रयास में जुटी है कि मृतका के शव की जल्द बरामदगी हो ताकि इस मामले का खुलासा हो सके। इसी सिलसिले में रविवार को भी पुलिस ने मोरनी रोड, सेक्टर-24 डंपिंग ग्राउंड के अलावा घग्गर के इर्द-गिर्द शव की तलाश की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। मंगलवार को मृतका के पति, आरोपी मनमोहन का रिमांड खत्म होने के बाद उसे दोबारा पेश किया जाएगा।
16 जनवरी से गुम हुई रजनी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मनीमाजरा में रहने वाली मोनिका और संदीप के अलावा पुलिस ने मनमोहन को भी गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर पुलिस को भले ही साड़ी, हत्या के लिए इस्तेमाल रस्सी, ज्वेलरी और मोबाइल कॉल डिटेल्स तो मिल चुकी है, लेकिन अगर हत्या की बात आरोपी ने कबूल कर ली है तो फिर शव की बरामदगी क्यों नहीं हो सकी है। पुलिस लगातार तीनों आरोपियों से पूछताछ करने सहित उनकी निशानदेही पर जगह-जगह छानबीन भी कर रही है। इस मामले में पुलिस मनमोहन के परिजनों से भी पूछताछ कर चुकी है। शनिवार को अदालत में पेशी से लौटते वक्त रजनी के परिजनों ने मनमोहन के साथ मारपीट की कोशिश करते हुए रोष जताया था।
शव की बरामदगी, अब भी एक सवाल
16 को गायब हुई रजनी की अगर उसी दिन हत्या कर दी गई थी तो अब तक शव का पता पुलिस क्यों नहीं लगा पाई है। सेक्टर-24 के डंपिंग ग्राउंड में दो शनिवार पहले की गई खुदाई में कुत्ते का शव बरामद हुआ था। वहीं से एक जूती भी पुलिस ने बरामद की थी, जिससे आशंका जताई जा रही थी कि शायद रजनी की हत्या के बाद भी शव को वहीं कहीं ठिकाने लगाया गया होगा। लेकिन साड़ी और रस्सी की चंडीगढ़ स्थित सीटीवी वर्कशॉप के पास नाले से बरामदगी से कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन, हत्या अगर डंपिंग ग्राउंड के पास की गई तो बाकी चीजें इतनी दूर कैसे पहुंची। हत्या के आरोपी को शव का नहीं पता, यह कैसे हो सकता है। मोनिका और संदीप ने पुलिस को बताया था कि हत्या के बाद उन्होंने मनमोहन को इस बात की जानकारी दे दी थी। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि शव को ठिकाने कब और किसने लगाया, यह 19 दिन गुजरने के बाद अभी भी एक सवाल बना हुआ है।