चंडीगढ़। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने साढ़े सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के मामले में साढ़े 13 साल के एक नाबालिग को दोषी करार देते ढाई साल कैद की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने इस कृत्य को अंजाम दिए जाने की क्षमता समेत नमूनों पर सीमन प्राप्त न होने जैसी कई दलीलें दीं मगर अदालत ने तय कानूनी सिद्धांतों और गवाहों समेत दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दे दिया। बोर्ड के समक्ष जुलाई 2022 में यह मामला आया था। सेक्टर-36 पुलिस थाने में नाबालिग के खिलाफ 17 मई 2022 को आईपीसी की धारा 376 एबी और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज हुआ था। दायर मामले के मुताबिक 17 मई 2022 को पुलिस चौकी सेक्टर-61 को सूचना मिली थी कि चौकी क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण इलाके में एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ है। बच्ची की मां लोगों के घरों में काम करती है, जबकि उसका पिता पेंटर है। उनके तीन बच्चों में से लगभग साढ़े सात वर्षीय बच्ची और उसका चार वर्ष का भाई साथ रहते थे। महिला काम पर जाते वक्त दोनों बच्चों को अपनी बहन के पास छोड़ जाती थी लेकिन घटना वाले दिन पीड़िता की मौसी को जरूरी काम से कहीं जाना पड़ गया। ऐसे में दोनों बच्चे घर में अकेले थे। जब उनकी मां काम से वापस आई तो बच्ची रो रही थी। पूछने पर उसने मां को सारी बात बताई।
बच्ची की मां की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर बच्ची की शिनाख्त के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया था। बच्ची की काउंसलिंग और मेडिकल करवाने के बाद उसके मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी 164 के बयान दर्ज करवाए गए। वहीं, नूमनों को जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया था। इस मामले में आरोपी का भी मेडिकल हुआ था। पुलिस ने जांच के बाद सीआरपीसी 173 के तहत अदालत में आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया था, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। इंस्पेक्टर सरिता राय मामले की जांचकर्ता पुलिस अधिकारी थी। आरोपी और पीड़िता के परिवार को मकान किराए पर देने वाले मकान मालिक के भी बयान अदालत में दर्ज हुए थे। जन्म प्रमाण पत्र के मुताबिक आरोपी नाबालिग की जन्मतिथि 28 अगस्त 2009 थी, जिसके हिसाब से अपराध के वक्त उसकी उम्र लगभग साढ़े 13 वर्ष थी। मामले में आरोपी के काफी छोटी उम्र का होने के चलते उसकी यौन क्षमता को लेकर भी पुलिस ने डॉक्टरी राय मांगी थी। मामले में बच्ची की तरफ से पेश महिला वकील मनप्रीत कौर ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने शक के दायरे से परे जाकर आरोपी के खिलाफ मामले को साबित किया है। मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों ने मजबूती से बयान दिए हैं और दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य पेश किए गए।
वहीं, बचाव पक्ष ने सवाल किया कि मौके के अहम चश्मदीद पीड़िता के छोटे भाई को अभियोजन पक्ष ने गवाह नहीं बनाया, जो मामले में संदेह पैदा करता है। वहीं, सैंपल के रूप में लिए गए कपड़ों पर आरोपी के सीमन की भी फोरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हुई थी। इसके अलावा आरोपी की याैन क्षमता को लेकर भी निश्चित राय सामने नहीं आई थी।