मनीमाजरा। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करते 15वें चंडीगढ़ राष्ट्रीय शिल्प मेले में शुक्रवार की शाम पारंपरिक लोक–संस्कृति का रंग पूरी तरह छाया रहा। पंजाब के राज्यपाल एवं उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के चेयरमैन गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि ऐसे मेले न सिर्फ भारतीय विरासत के सशक्त वाहक हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वे कलाग्राम में आयोजित मेले के मुख्य समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों की रचनात्मकता, कौशल और परंपराओं से आने वाली पीढ़ियों में सांस्कृतिक चेतना जागृत होती है। करीब 500 लोक कलाकारों की उपस्थिति को उन्होंने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनोखा उदाहरण बताया।
कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री के लोकल फॉर वोकल अभियान को गति देने में देशभर के सातों सांस्कृतिक केंद्र सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान, उनकी टीम तथा चंडीगढ़ सांस्कृतिक कार्य विभाग की विशेष रूप से प्रशंसा की। कार्यक्रम की शुरुआत में फुरकान खान ने राज्यपाल, प्रमुख सचिव विवेक प्रताप सिंह, चंडीगढ़ प्रशासन के गृह एवं सांस्कृतिक सचिव मनदीप बराड़ और सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक सौरभ अरोड़ा का पौधा भेंटकर स्वागत किया। अंत में सौरभ अरोड़ा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल ने किया पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर राज्यपाल कटारिया ने डॉ. राजेश कुमार व्यास की पुस्तक ‘नाट्यशास्त्र-पंचम वेद पर एकाग्र’ का विमोचन किया।
छह कलाकारों को मिला लोक कला साधक व युवा पुरस्कार
कार्यक्रम में प्रदेश की लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने वाले छह कलाकारों को सम्मानित किया गया। लोक कला साधक सम्मान-2025 के लिए पंजाब के मेजर सिंह, हिमाचल के सिरमौरी गायक प्रेमचंद बाउनली, कश्मीर के धमाली नृत्य को लोकप्रिय बनाने वाले बशीर अहमद शाह और उत्तराखंड के फोक कलाकार प्रकाश सिंह विष्ट को चुना गया। प्रत्येक कलाकार को ढाई लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र दिया गया। युवा पुरस्कार-2025 के तहत किशनगढ़ (राजस्थान) की अंजना कुमावत तथा रोहतक (हरियाणा) के फोक डांसर नरेश कुमार को एक-एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
लोक नृत्यों के महासंगम ने बांधा समां
कलाग्राम में दस राज्यों के लोक नृत्यों की कोरियोग्राफिक प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। मशहुर कोरियोग्राफर सुशील शर्मा के निर्देशन में रौफ-जगरना, छापेली, रायबेंशे, झूमर-भांगड़ा, धनगरी, घूमर, कालबेलिया आदि नृत्य रूपों का ऐसा लयबद्ध संगम प्रस्तुत किया गया कि दर्शक झूम उठे।
वहीं वेल्स (यूके) वर्ल्ड फोक कंपटीशन में प्रथम आए पंजाब के बच्चों के भांगड़ा प्रदर्शन ने दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। मेले में संस्कृति, संगीत और लोक कला का यह अनूठा उत्सव देर तक लोगों के दिलों में गूंजता रहा।