पंजाब और हरियाणा द्वारा अपने राज्यों के सभी डेरों की जांच संबंधी आदेश का सही पालन किया गया होता तो पंचकूला हिंसा जैसी घटना नहीं होती। यह टिप्पणी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश का पालन न होने को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंचकूला हिंसा मामले में सुनवाई कर रही फुल बेंच को मामला रेफर कर दिया।
बुधवार को सुनवाई के दौरान पंजाब और हरियाणा ने अपने जवाब दायर किए। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों राज्यों के जवाबों से यह साफ है कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 में पंजाब और हरियाणा के सभी डेरों की जांच के जो आदेश दिए थे उन आदेशों पर दोनों ही राज्यों ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में अब बेहतर होगा कि इस अवमानना याचिका पर भी फुल बेंच ही सुनवाई करे जो पंचकूला में डेरामुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद हुए दंगों, आगजनी और तोड़फोड़ के मामलों की सुनवाई कर रही है।
एडवोकेट रवनीत जोशी ने अवमानना याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि संत रामपाल प्रकरण के बाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 में पंजाब और हरियाणा के सभी डेरों की जांच के आदेश दिए थे। वर्ष 2017 में जब डेरा मुखी गुरमीत सिंह राम-रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया था तो उसके समर्थकों ने पंचकूला सहित राज्य में कई जगह दंगे कर दिए थे। इसके बाद जोशी ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि अगर हरियाणा सरकार हाईकोर्ट के वर्ष 2015 के आदेशों का पालन कर डेरों की जांच कर लेती तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होनी थी।