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कोर्ट ने जिन 8 को बेकसूर कहा, पुलिस ने कहा माओवादी

Fri, 31 Jul 2015 02:55 PM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव के आठ लोगों के कोर्ट से बेकसूर साबित होने के बावजूद पुलिस ने पहले तो उन्हें ‘बैड करेक्टर’ की सूची में बनाए रखा, और अब एक अन्य मामला दर्ज करते हुए अपने रिकार्ड में उन्हें ‘माओवादी’ लिख लिया है।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष उक्त मामले की सुनवाई के दौरान याचियों के वकील ने यह खुलासा किया, जिस पर मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर कुरुक्षेत्र के एसपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। याचियों की ओर से बताया गया कि इस्माइलाबाद पुलिस स्टेशन ने 110 सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोपियों को ‘माओवादी’ लिखा गया है।

विभिन्न मामलों में पुलिस द्वारा पकड़े गए लोगों को हमेशा के लिए ‘बैड करेक्टर’ के रूप में दर्ज कर लिए जाने के खिलाफ जारी उक्त मामले की पिछली सुनवाई के दौरान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस विजेंद्र जैन ने आयोग के महानिदेशक को एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे, ताकि इस विषय पर राज्य सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें।
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सुनवाई के दौरान महानिदेशक ने यह कहते हुए समय मांगा कि वे इस मामले में अन्य राज्यों में जारी नियमों का अध्ययन करना चाहते हैं।
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दो नवंबर को होगी मामले की सुनवाई

आयोग ने उन्हें और समय देते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर तय कर दी। किसी भी अपराध में पकड़ा गया व्यक्ति भले ही कोर्ट से बेगुनाह साबित होकर छूट जाए, लेकिन आमतौर पर यही देखा गया है कि पुलिस के रजिस्टर में उसका नाम और फोटो ‘बैड करेक्टर’ के तौर पर दर्ज हो जाता है।

ऐसा ही मामला लेकर कुरुक्षेत्र जिले के आठ लोगों ने राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उप तहसील इस्माइलाबाद के गांव चम्मू कलां, गांव इस्माइलाबाद और गांव खेड़ी शहीदां के निवासी जयभगवान, जीत राम, नरेश कुमार, दर्शन सिंह, सतीश कुमार, धर्मपाल, नरेश कुमार और बिंदर ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष याचिका देकर कहा कि वे पुलिस के रिकार्ड में ‘बैड करेक्टर’ हैं, जोकि उनके नाम के साथ 2005-06 में दो मामले दर्ज करते हुए पुलिस ने लगाया था।

याचिका के अनुसार, इन मामलों में से एक आईपीसी की धारा 124ए का था, जिसमें उन्हें जमानत मिल गई और बाद में अदालत में केस खारिज हो गया। इसके अलावा दूसरा मामला आईपीसी की धारा 323, 342 व 506 के तहत दर्ज किया गया, लेकिन वे सभी इस केस में बरी हो गए। याचिका में कहा गया है कि इसकेबावजूद पुलिस ने उनके नाम के साथ लगे ‘बैड करेक्टर’ केठप्पे को नहीं हटाया, जिससे वे आज तक अपने आसपास के लोगों में अपमानित हो रहे हैं।
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