हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के पुत्र, हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के सुप्रीमो और मौजूदा विधायक कुलदीप बिश्नोई सहित 24 लोगों को जिला अदालत ने एक आपराधिक मामले में बरी कर दिया।
सेक्टर-11 थाना पुलिस ने कुलदीप बिश्नोई सहित 26 के खिलाफ 5 मार्च 2010 को सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में हुई रैली के दौरान हत्या के प्रयास, हथियारों सहित दंगा करने, पुलिस ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
वीरवार को ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट सुखदा प्रीतम की कोर्ट ने बिश्नोई सहित 24 को सबूतों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया। वहीं मामले में एक आरोपी पंचकूला निवासी बलकार सिंह को अदालत पहले ही भगोड़ा करार दे चुकी है। जबकि पूर्व सीएम चौधरी भजन लाल का केस के ट्रायल के दौरान देहांत हो गया था। इसके बाद केस में कुल 24 आरोपी थे।
ये है मामला
हरियाणा की हुड्डा सरकार की नीतियों के विरोध में 5 मार्च 2010 को सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई सहित पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल और पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता जमा हुए थे। पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार रैली के बाद सभी हरियाणा सिविल सचिवालय की ओर कूच करने के लिए निकले।
पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरीकेड्स लगा रखे थे। सभी ने जबरदस्ती इन्हें पार करने का प्रयास किया। पुलिस ने इन्हें रोका तो लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इससे करीब 30 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। इस दौरान कई सरकारी और निजी वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
पुलिस को आंसू गैस के गोले और वॉटर कै नन तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान 30 के करीब पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। सेक्टर-11 थाने में इनके खिलाफ हथियारों के साथ दंगा करने, पुलिस ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व हत्या के प्रयास की अहम धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि सेशन कोर्ट में फरवरी 2013 में हत्या के प्रयास की धारा पुलिस साबित नहीं कर पाई थी और यह धारा हटाते हुए इसे ट्रायल के लिए निचली अदालत में भेज दिया गया था।
ये हुए बरी
कुलदीप बिश्नोई (विधायक) निवासी पंचकूला, धर्मपाल मलिक (पूर्व विधायक) निवासी सोनीपत, रण सिंह मान (पूर्व विधायक) निवासी भिवानी, दिनेश गौड़ निवासी अंबाला, भरतू राम निवासी कैथल, धर्मपाल निवासी महेंद्रगढ़, कमल कुमार निवासी महेंद्रगढ़, वजीर सिंह निवासी हिसार, राजेंद्र यादव निवासी महेंद्रगढ़, करणदीप शर्मा निवासी अंबाला, भवानी शर्मा निवासी महेंद्रगढ़, कुलदीप सिंह निवासी अंबाला, हनुमान बिश्नोई निवासी हिसार, धनपत निवासी भिवानी, भगवान शर्मा भिवानी, सतबीर सिंह निवासी हिसार, बलवंत सिंह निवासी कुरुक्षेत्र, रामपाल निवासी फतेहाबाद, विनोद कुमार निवासी हिसार, सुनील निवासी हिसार, हनुमान जांगरा निवासी हिसार, राम दीया फतेहाबाद, राजेंद्र निवासी हिसार, गौरव निवासी अंबाला।
पुलिस नहीं साबित कर सकी आरोप
यूटी पुलिस ने केस में तीन डीएसपी सहित कुल 14 कर्मियों की गवाही कराई थी। इनमें रोशन लाल (अब एसपी), पूर्व डीएसपी जसवंत सिंह और जगबीर सिंह भी शामिल थे। बचाव पक्ष के अनुसार पुलिस की ओर से पेश गवाह कोर्ट में यह साबित नहीं कर सके कि किस आरोपी ने किस पर और किस चीज से हमला किया। वह किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सके थे। पुलिस गवाहों के बयानों में केस की सुनवाई के दौरान अंतर पाया गया था।