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महज शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द नहीं कर सकती अदालत, आवश्यक कारण दर्ज करना जरूरी : हाईकोर्ट

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महज शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द नहीं कर सकती अदालत, आवश्यक कारण दर्ज करना जरूरी : हाईकोर्ट
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-जमानत रद्द करने के लिए सभी तथ्यों पर विचार कर आदेश जारी करना जरूरी
-एनडीपीएस मामले में महिला की जमानत रद्द करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया खारिज

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि केवल जमानत की शर्त का उल्लंघन करने पर किसी आरोपी की जमानत रद्द नहीं की जा सकती। आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आखिर क्यों जमानत रद्द करना अनिवार्य है।
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याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी रजिया ने हाईकोर्ट को बताया कि 8 सितंबर 2020 को एनडीपीएस के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी जिसमेंं याची आरोपी थी। इसके बाद उसे 12 अक्तूबर 2020 को अदालत ने जमानत दे दी थी और आदेश में स्पष्ट किया था कि यदि उसका नाम एनडीपीएस के किसी अन्य मामले में आया तो जमानत ऑटोमेटिक कैंसिल हो जाएगी। इसके बाद याची का नाम एनडीपीएस के दो मामलों में सामने आया और पुलिस ने जमानत रद्द करने के लिए अर्जी दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते हुए लगाई गई शर्त के उल्लंघन को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता की जमानत रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऑटोमेटिक जमानत रद्द करने का आदेश जारी करने का अदालत को अधिकार नहीं है। जमानत रद्द करने का जांच एजेंसी का आवेदन मिलने पर विभिन्न तथ्यों व स्थिति पर विचार करना जरूरी है। जमानत रद्द करने का कारण आदेश में स्पष्ट किया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया है।
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