जिले के अलावा आसपास के इलाके में रोक के बावजूद सेना की वर्दी व सेना से जुड़े अन्य साजो सामान की सरेआम हो रही बिक्री देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में चंद मुनाफे के लिए देश की सुरक्षा को बेचा जा रहा है। जबकि प्रशासन की ओर से हर बार बिक्री को रोकने का आर्डर जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला छुड़ा लिया जाता है। इससे पुलिस और प्रशासन पर भी उंगली उठना लाजमी है। सवाल उठता है कि प्रशासन का काम सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित क्यों है।
सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील पठानकोट जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिला में कुछ माह पूर्व सेना की वर्दी में आए आतंकियों ने हमला किया था। उसके बाद सेना की ओर से सख्ती दिखाकर सैन्य वर्दी की सरेआम बिक्री को रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया था, लेकिन मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया है।
नतीजा यह है कि चंद पैसों के लालच में कुछ लोग देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं। इस मामले में बुलेट प्रुफ जैकेट के अलावा सेना के अन्य प्रतिबंधित सामान के साथ कबाड़ी की गिरफ्तारी इसकी ताजा नजीर है। जाहिर है ऐसे हालत में सेना की वर्दी आतंकियों के हाथ भी आसानी से लग सकती है।
काबिलेगौर है कि पठानकोट और आसपास की अन्य सैन्य छावनियां पहले से ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निशाने पर रही हैं। पूर्व में भी एशिया की दूसरी सबसे बड़ी ममून छावनी समेत अन्य सैन्य ठिकानों से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों के साथ जासूस और आईएसआई एजेंट भी काबू किए जा चके हैं। चार माह पहले ही एयरफोर्स की गुप्त सूचना लीक करने के आरोप में एयरफोर्स के एक जवान को काबू किया गया था।
आरोप था कि उसने फेसबुक के जरिए अपनी एक विदेशी महिला मित्र को गोपनीय सूचनाएं मुहैया कराई थी। डीएसपी सिटी मनोज कुमार की मानें तो सेना की वर्दी व अन्य साजो सामान की बिक्री को रोकने के लिए प्रशासन और सेना के अधिकारियों के साथ मीटिंग की जाएगी। मीटिंग के बाद नए सिरे से अभियान शुरू किया जाएगा।