चंडीगढ़। शहर में करीब 32 हजार पानी के मीटर खराब हैं। नगर निगम की तरफ से लगातार इन मकान मालिकों को मीटर बदलने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं लेकिन वह इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। निगम ने फैसला किया है कि अब वह खुद पानी के मीटर को बदलेंगे और मीटर को खरीदने और लगाने में जो खर्च आएगा, वह मकान मालिक के पानी के बिल में जोड़कर भेज दिया जाएगा। निगम ने ऐसा करने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है और वाटर बायलॉज में संशोधन का प्रस्ताव भेजा है।
शहर में करीब 40 हजार पानी के मीटर खराब थे। नगर निगम ने उपभोक्ताओं को बार-बार इन्हें ठीक करने के लिए नोटिस भेजा। इसके बाद कुछ महीनों में करीब 8000 लोगों ने पानी के मीटर बदल लिए, लेकिन अब तक करीब 32 हजार पानी के मीटर पिछले 5 वर्षों से खराब पड़े हैं। नगर निगम इन उपभोक्ताओं को नोटिस भेज-भेज कर थक गया है लेकिन इन्होंने मीटर नहीं बदलवाए हैं। इसकी वजह से यह कभी नहीं पता चल पाता कि उपभोक्ता कितनी पानी की खपत कर रहा है, क्योंकि पानी का मीटर खराब होने की स्थिति में उपभोक्ता को एवरेज पर पानी का बिल भेजा जाता है। मंगलवार को हुई सदन की बैठक के दौरान नगर निगम के कई पार्षदों ने पानी के बिलों का मुद्दा उठाया। पार्षदों ने कहा कि पानी के बिल कई गुना ज्यादा भेजे जा रहे हैं। कुछ ने खराब पानी की मीटर का मुद्दा भी उठाया। निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि नगर निगम ने पहले ही यूटी प्रशासन को चंडीगढ़ वाटर सप्लाई बायलॉज में संशोधन करने के लिए लिखा है। मांग की गई है कि निगम को शक्तियां दी जाएं ताकि वह खुद उपभोक्ता के पानी के खराब मीटर को बदले और जो खर्च आए, उसे बिल में जोड़ कर भेजा जा सके। आयुक्त ने कहा कि प्रशासन की तरफ से नोटिफिकेशन जारी होने के बाद निगम खुद मीटर बदलने का काम शुरू कर देगा। निगम ने कई मीटर खरीद भी लिए हैं।
वर्तमान नियमों के अनुसार उपभोक्ता खुद खरीदता है मीटर
वर्तमान में समय-समय पर संशोधित उपनियमों के प्रावधान के अनुसार उपभोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि वह खराब मीटर को बदले। मीटर खरीदने की जिम्मेदारी भी उपभोक्ता की होती है। हालांकि, बदलने के लिए नगर निगम के कर्मचारी जाते हैं। नियमों के अनुसार बिल जारी होने के दिन से एक महीने के अंदर खराब पानी के मीटर को बदलना होता है। यह नियम मीटर खोने या चोरी होने के मामले पर भी लागू होता है।
दो महीने में पानी बर्बादी के करीब 2311 मामले आए, 8 कनेक्शन काटे
पीने का पानी बर्बाद करने वालों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई 15 अप्रैल से जारी है। अब तक कुल 2311 मामले सामने आए हैं। अधिकतर को नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद 2249 लोगों ने अपनी गलती सुधार ली। बार-बार गलती करने पर आठ कनेक्शन काटे गए हैं। वर्तमान में 341 लोगों को चालान जारी किए गए हैं। 35 लोग ऐसे हैं, जिन्हें दूसरी बार चालान भेजा गया है। वीरवार को भी यह कार्रवाई जारी रही। शहरभर में पानी की बर्बादी व लीकेज पर 21 लोगों को नोटिस दिया गया है और पीने के पानी से कार-बाइक धोते व गार्डन को पानी देने पर मौके पर ही 4 लोगों के चालान काटे गए हैं। चालान काटने के लिए नगर निगम ने 18 एसडीई की टीम बनाई है, जो सुबह 5.30 बजे से 8.30 बजे के बीच चालान काट रही है। चालान की राशि 5512 रुपये संबंधित मकान मालिक के पानी के बिल में जोड़कर भेजा जाएगा। यह अभियान 30 जून तक चलेगा।