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चंडीगढ़ में कंटेनमेंट जोन में सड़ रहे मरीजों के घाव, गंभीर आरोप- डॉक्टर नहीं कर रहे इलाज

Fri, 05 Jun 2020 12:17 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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चंडीगढ़ में लंबे समय से कंटेनमेंट जोन में फंसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। खासकर उन मरीजों का हाल बुरा है, जो घावग्रस्त हैं। इन मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने से अब इनका घाव सड़ने की कगार पर पहुंच गया है।
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सेक्टर-30 बी में ऐसे एक या दो नहीं, लगभग दर्जन भर से ज्यादा मरीज हैं, जो गंभीर स्थिति में हैं। इनका इलाज लगभग 2 महीने से रुका हुआ है। स्थिति यह है कि बाहर से अंदर जाने वाली डॉक्टरों की टीम केवल खानापूरी कर वापस लौट आ रही है।

सेक्टर-30बी निवासी भुवन और नवनीत का कहना है कि उन्होंने टीम के डॉक्टरों से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने ड्रेसिंग करने से साफ इंकार कर दिया। बाहर से डॉक्टर बुलाकर ड्रेसिंग कराने की भी अनुमति नहीं मिल रही है।
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ऐसी स्थिति में उन्होंने बिना अनुमति अपने मरीज को बाहर ले जाने की बात कही तो उन्हें चेतावनी मिल गई कि वह दोबारा लौटकर अपने घर तब तक नहीं आ पाएंगे जब तक वहां से कंटेनमेंट जोन हटा नहीं लिया जाता। उन्हें तब तक बाहर ही रहना पड़ेगा। इस तरह की बातों से डराकर वे हमें और ज्यादा परेशान कर रहे हैं।

कोरोना से बचाव के लिए हुई थी व्यवस्था

बापूधाम के साथ ही सेक्टर-30 बी में कोरोना के मरीजों की दिनोंदिन बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने यहां भी कंटेनमेंट जोन घोषित किया था, ताकि वहां के लोगों का बाहर के लोगों से संपर्क न हो और कोरोना के चेन को ब्रेक किया जा सके। लेकिन कोरोना से बचाव की यह रणनीति वहां फंसे अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों के लिए आफत बन गई है। 

इलाके में रह रहे लोगों का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए घरों में कैद कर दिया गया है लेकिन जो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं अगर उन्हें समय रहते इलाज नहीं मिला तो वे शायद कोरोना से तो बच जाएंगे लेकिन उनकी बीमारी उनका जान ले लेगी।      

अब तक उस इलाके से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर मरीजों को कोई परेशानी हो रही है और डॉक्टरों की टीम उसे नजरअंदाज कर रही है तो ये गलत है। शुक्रवार को टीम ऐसे मरीजों तक पहुंचेगी और उन्हें इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।   
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच 16
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केस 1: सेक्टर-30 बी निवासी नवनीत कुमार के पिता रिशु प्रताप सिंह शुगर के मरीज हैं। एक साल पहले उनका कुल्हा ट्रांसप्लांट किया गया था। बेड पर रहने के कारण उन्हें बेडसोर हो चुका है। पिछले 2 महीने से सही तरीके से ड्रेसिंग न होने के कारण उनका घाव अंदर ही अंदर सड़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि उनके घाव की अब बदबू आने लगी है। कंटेनमेंट जोन घोषित होने के कारण सेक्टर-30 बी से न तो कोई बाहर आ सकता है और न बाहर का कोई डॉक्टर अंदर जाकर इलाज कर सकता है। ऐसी स्थिति में रिशु प्रताप की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है।    

केस 2: सेक्टर-30 बी निवासी भुवन मिश्रा के दादाजी पीएल मिश्रा को भी शुगर है। चार महीने पहले उनके पैर की अंगुलियां कट गईं थीं।  2 महीने से सेक्टर के कंटेनमेंट जोन घोषित होने के कारण उनकी कटी अंगुलियों की सही तरीके से ड्रेसिंग नहीं हो पा रही है। इससे उनका घाव बढ़ता ही जा रहा है। दर्द और उनकी परेशानी परिवारवालों से देखी नहीं जा रही। तमाम प्रयास और अधिकारियों से विनती करने के बाद भी भुवन घर पर डॉक्टर बुलाकर अपने दादाजी की कटी अंगुलियों की ड्रेसिंग नहीं करा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं यह घाव उनके दादाजी की स्थिति को खराब न कर दे।
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