कोरोना संकट में दिल्ली की केजरीवाल सरकार अपने तौर तरीकों को लेकर लगातार भाजपा के निशाने पर है। इस बार मामला हरियाणा से जुड़ा है। कोरोना पॉजिटिव सब इंस्पेक्टर के शव को बिना बताए उसके परिजनों को सौंप दिया गया। कोरोना महामारी से जूझ रही हरियाणा सरकार दिल्ली सरकार की इस हरकत से आगबबूला है। मुख्य सचिव ने इस बाबत दिल्ली के मुख्य सचिव से बात करके उन्हें विरोध जताया है। वहीं मामले में दिल्ली के एक अस्पताल और मृतक के परिवार वालों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
गृह मंत्री अनिल विज ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सोनीपत निवासी सब इंस्पेक्टर पिछले दिनों दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हुआ था। मरीज को ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका थी, जिसके चलते उसे अस्पताल में लाया गया था। जिस वार्ड में यह मरीज था, उसी के पास एक कोरोना पॉजिटिव केस भी दाखिल किया गया। जिसके चलते उक्त सब इंस्पेक्टर को भी कोरोना संक्रमण हो गया और उसकी मौत हो गई।
दिल्ली प्रशासन ने बिना हरियाणा सरकार को इस बात की जानकारी दिए शव उसके परिजनों को सौंप दिया। अंतिम संस्कार में पुलिसकर्मियों को सलामी देने के लिए भी बुलाया गया। गांव के अन्य लोग भी अंत्येष्टि में शामिल हुए। जबकि संकट के इस दौर में सरकार अधिक लोगों को किसी की भी अंत्येष्टि में शामिल होने की इजाजत नहीं दे रही है। ऐसे में अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि मौके पर मौजूद लोगों को भी संक्रमण होने की संभावना है।
फिलहाल अंत्येष्टि में शामिल हुए लोगों की जांच की जा रही है। वहीं हरियाणा सरकार को जब इस बात की जानकारी मिली तो राज्य की मुख्य सचिव केशनी आनंद ने दिल्ली के मुख्य सचिव से इस बात का विरोध जताया और भविष्य में ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने के लिए कहा। चूंकि दोनों राज्य एक दूसरे की सीमा से जुड़े हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कतई लापरवाही नहीं बरती जा सकती।
पिछले दिनों राजस्थान का एक संक्रमित व्यक्ति अंबाला छावनी आया था। जैसे ही राजस्थान सरकार को पता चला, उन्होंने हमें सूचना दी और हमने उस व्यक्ति को क्वारंटीन किया। दिल्ली सरकार को भी ऐसा करना चाहिए था, लेकिन हुआ नहीं। दिल्ली सरकार की इस चूक पर हमने विरोध जताया है।
- अनिल विज, गृह मंत्री, हरियाणा