चंडीगढ़ में तीन मई तक कर्फ्यू लग गया है और इसे सख्ती से लागू कराने के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि मोहाली और पंचकूला में बढ़ता संक्रमण चंडीगढ़ में ना पहुंच सके। इसलिए सभी बॉर्डर एरिया के आसपास सख्ती बढ़ा दी गई है। साथ ही इमरजेंसी में जिम्मेवारी से दिक्कतों को दूर करना भी हमारा कर्तव्य है।’ यह कहना है चंडीगढ़ की एसएसपी नीलांबरी जगदले का। उन्होंने अमर उजाला रिपोर्टर द्वारा पूछे गए सभी सवालों का बखूबी जवाब दिया। इंटरव्यू में पूछे गए कुछ सवाल-जवाब के मुख्य अंश-
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सवाल- फील्ड वर्क के अलावा क्वारंटीन मरीजों को रखने वाली जगह पर भी पुलिस की ड्यूटी लगती है, ऐसे में खुद के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा की तैयारी कैसी है?
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जवाब- शहर में जीएमएसएच-16, पीजीआई और जीएमसीएच-32 तीन बड़े अस्पताल हैं। इन जगहों पर चौकी के पुलिस जवानों के अलावा अन्य जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई है, ताकि सभी की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा इन जगहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को पीपीई किट मुहैया करवाई गई है। साथ ही पुलिसकर्मियों को किसी भी स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग भी दी गई है। अगर कोई मरीज वहां से भागने की कोशिश करता है तो उसे कैसे संभाला जाए, इसके बारे में सिखाया गया है। समय-समय पर सैनिटाइज, मास्क और ग्लब्ज भी उन्हें दिए जाते हैं।
सवाल- चंडीगढ़ के मुकाबले मोहाली और पंचकूला में कोरोना के केस ज्यादा हैं। केस ना बढ़े इसे लेकर बॉर्डर एरिया पर क्या तैयारी है?
जवाब- मोहाली और पंचकूला के 56 इंट्री प्वाइंट चंडीगढ़ से लगते हैं, जिनमें से 18 को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। बाकी के 38 पर 24/7 शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है। इन प्वाइंट से चंडीगढ़ आने वाले लोगों के पास जो पास हैं, उनको अच्छी तरीके से चेक किया जा रहा है। साथ ही उनसे शहर में आने की वजह भी पूछी जा रही है। हाल ही में जगतपुरा में कोरोना का केस आने के बाद वहां लगते फैदां गांव को पूरी तरह सील करके सभी की इंट्री बंद कर दी गई है।
सवाल- चंडीगढ़ में हालात बिगड़ते हैं तो पुलिस कितनी तैयार है?
जवाब- एमएचए की गाइडलाइंस के बाद शहर में पुलिस इतनी सख्त हो गई है कि हालात बिगड़ने का कोई मतलब नहीं बनता है। फिर भी अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ती है तो पुलिस पूरी तरह तैयार है। कुछ संवेदनशील जोन को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा क्वारंटीन सेंटर को रिजर्व में रखा गया है। जिन एरिया में कोरोना के मरीज पाए गए हैं, उनके सारे संपर्क चिह्नित करके उन्हें भी क्वारंटीन किया गया है। रोजाना बीट बॉक्स पुलिस चेक करती है कि एरिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। साथ ही मार्केट में भी पुलिस की मदद से सोशल डिस्टेंसिंग का काफी ख्याल रखा गया है। इन सभी की वीडियोग्राफी और फोटो करवाकर रिकॉर्ड भी मेंटेन किया जा रहा है।
सवाल- जरूरतमंद लोगों की मदद करने पर पुलिस पर फूलों की बारिश हो रही है, इसे भविष्य में भी कैसे मेंटेन रखेंगे?
जवाब- इमरजेंसी के दौरान यह नहीं सोचना पड़ता कि मेरी ड्यूटी है या किसी और की, सभी दिक्कतों को हल करना हमारा कर्तव्य है। थानों में और शहर भर में जितने भी पुलिसकर्मी तैनात हैं, सभी खुद ही जिम्मेदारी लेकर जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं। जगह-जगह राशन समेत अन्य जरूरी सामग्री बांटकर उनका पेट भरने में जुटे हैं। यही वजह है कि लोग पुलिसकर्मियों पर फूलों की बारिश करके उन्हें मालाएं पहनाकर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं।
सवाल- ट्रैफिक मुलाजिमों की स्क्रीनिंग की जा रही है, जबकि थाने के पुलिसकर्मियों की नहीं, ऐसा क्यों?
जवाब- यह गलत है। सभी यूनिट की चेकिंग की जा रही है। हेडक्वार्टर की तरफ से टीम बनाई गई हैं, जो सभी यूनिट के पुलिसकर्मियों की चेकिंग कर रही हैं। अगर किसी ने सिर्फ ट्रैफिक पुलिस की ही चेकिंग के बारे में कहा है तो वह सही नहीं है।
सवाल- पहले के मुकाबले अब आपका शेड्यूल ज्यादा बिजी गया है, इसे कैसे मैनेज करतीं हैं?
जवाब- जी बिल्कुल, पहले के मुकाबले अब ज्यादा शेड्यूल बिजी हो गया है। पहले हफ्ते में एक से दो बार फील्ड विजिट करना होता था, जबकि अब रोज फील्ड विजिट करना जरूरी है। साथ ही सीनियर अफसर भी फील्ड में ही होते हैं। जवान धूप में 12-12 घंटे खड़े होकर ड्यूटी करते हैं। उनका मनोबल बढ़ाने के लिए बताना होता है कि हम भी फील्ड में हैं। आपके साथ हैं। एक वजह यह भी है कि जवानों की दिक्कतों को समझने के लिए फील्ड पर पहुंचना जरूरी है। तभी पता लग सकेगा कि किसे किस तरह की दिक्कत है। इसलिए ऑफिस वर्क कम हो गया। यही वजह है शेड्यूल पूरा बदल गया है।
सवाल- आप इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हो गईं हैं, क्या वजह है?
जवाब - पब्लिक से जुड़ने के लिए इन सभी संसाधनों का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है। अभी किसी से डायरेक्ट संपर्क करना मुश्किल है, इसलिए सोशल मीडिया से लोगों का फीडबैक जानना जरूरी है। अगर उनको कोई दिक्कत आ रही है तो हम उन्हें हल कर सकें। इसलिए हमने सोशल मीडिया को हथियार बनाया हुआ है।