नशा तस्करी से संबंधित चौथी रिपोर्ट खोलने पर पूर्व डीजीपी सुरेश कुमार ने अर्जी दाखिल कर आपत्ति जताई और मामले में पक्ष बनने की मांग की। हाईकोर्ट ने इस पर पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय व दिनकर गुप्ता (वर्तमान में एनआईए चीफ) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुरेश अरोड़ा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चट्टोपाध्याय ने तीन रिपोर्ट 2018 में सौंप दी थी। इन रिपोर्ट के साथ ही उन्होंने एक और रिपोर्ट सौंपी थी, जिस पर एसआईटी के दो सदस्यों ने दस्तखत भी नहीं किए थे। अरोड़ा ने बताया कि जब उनकी रिटायरमेंट नजदीक थी और नए डीजीपी की तलाश की जा रही थी तो उस दौरान चट्टोपाध्याय इस पद को चाहते थे।
चट्टोपाध्याय ने कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश से बाहर जाकर यह चौथी रिपोर्ट दी है। उन्होंने कहा-इस रिपोर्ट को उनके खिलाफ तैयार किया गया है और ऐसे में इसे खोला न जाए। कोर्ट ने इसे खोलने के बाद कहा कि इसे देखते हुए प्रारंभिक तौर पर लगता है कि यह विभागीय द्वेष का परिणाम है। ऐसे में इस मामले में पूर्व आईपीएस (वर्तमान एनआईए प्रमुख) दिनकर गुप्ता व पूर्व आईपीएस सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय का पक्ष सुनना जरूरी है।
हमारे कंधे पर बंदूक रख चलाने का किया जा रहा प्रयास
कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में हमारे कंधे पर बंदूक रखकर चलाने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक की स्थिति का आकलन करने से यह पूरा मामला राजनीतिक रंजिश का प्रतीत होता है।
चट्टोपाध्याय की बढ़ीं मुश्किलें
अमृतसर में एक बिजनेसमैन की आत्महत्या के मामले में डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय का नाम सामने आया था। उस समय उन्होंने इस पूरे मामले में साजिश का अंदेशा जताया था और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने तब इस मामले की जांच पर रोक लगा दी थी। अब इस मामले में पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। ऐसे में अब इस मामले में चट्टोपाध्याय की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।