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भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिलाने की एसजीपीसी की पहल पर विवाद, सिख विद्वानों ने खड़े किए सवाल

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Updated Sat, 21 Sep 2019 09:03 AM IST
शहीद भगत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए एसजीपीसी केंद्र सरकार को पत्र लिखने जा रही है। एसजीपीसी के इस कदम पर विवाद हो गया है। सिख विद्वान सवाल खड़ा करने लगे हैं कि क्या भगत सिंह पूर्ण मर्यादा वाले सिख थे? क्या यह काम एसजीपीसी का है? यह किसी से छिपा नहीं है कि आम लोग तो भगत सिंह को शहीद-ए-आजम कहती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं मानती। देश को आजाद हुए सात दशक से अधिक हो गए, लेकिन आज भी किताबों में उन्हें क्रांतिकारी आतंकी लिखा जा रहा है।

अगस्त 2013 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में भगत सिंह को शहीद माना था, इसके बावजूद अब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ। भगत सिंह को जो अंग्रेज मानते थे, आजादी के बाद सरकारी रिकॉर्ड में आज भी वही स्थिति है। उनके वंशज शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के प्रमुख और भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू कहते हैं कि आजादी के बाद सभी सरकारों ने सिर्फ नरम दल वालों को सम्मान दिया, जबकि गरम दल वाले क्रांतिकारी हाशिए पर रहे हैं। दिल्ली यूनिविर्सटी में पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाई जा रही ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ नामक पुस्तक में शहीद भगत सिंह को जगह-जगह क्रांतिकारी आतंकवादी कहा गया था।

पंजाब सरकार भी भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने पर अपने हाथ खड़े कर चुकी है। पंजाब सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-18 के तहत एबोलिशन ऑफ टाइटल्स नियम का हवाला देते हुए कहा कि सरकार फौजियों के अलावा किसी को कोई टाइटल नहीं दे सकती। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट हरि चंद अरोड़ा ने सरकार को पत्र लिखकर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च द्वारा प्रकाशित किताब डिक्शनरी ऑफ मार्टियर्स : इंडियाज फ्रीडम स्ट्रगल का जिक्र करते हुए कहा है कि इस किताब में भारत के शहीदों का वर्णन है।
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अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने मीटिंग कर फैसला लिया है कि एसजीपीसी केंद्र सरकार से बात करेगी और उनको लिखित पत्र भेजा जाएगा कि भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को शहीद का दर्जा दिया जाए। इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है। एसजीपीसी की सदस्य बीबी किरणजोत कौर का कहना है कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा दिलाना एसजीपीसी का काम नहीं है। सिखों के शहीदों को सरकारी मान्यता की जरूरत ही नहीं है। भगत सिंह सिख मर्यादा मुताबिक सिख रोल मॉडल नहीं हैं।

प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. लखविंदर जौहल का कहना है कि एसजीपीसी का काम सिख धर्म का प्रसार है। एसजीपीसी को उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। भगत सिंह पूर्ण मर्यादा वाले सिख नहीं थे। वहीं प्रसिद्ध लेखिका बब्बू तीर का कहना है कि एसजीपीसी का यह कदम सराहनीय है। भगत सिंह पूरे देश के हीरो हैं और युवाओं के दिलों की धड़कन है। उनके लिए अगर एसजीपीसी कदम उठा रही है तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। उलटा सिख विद्वानों को चाहिए कि वह एकजुट होकर एसजीपीसी के साथ खड़े हो जाएं।

पंजाब के प्रसिद्ध लेखक और हिंद पाक दोस्ती मंच के महासचिव सतनाम मानक का कहना है कि एसजीपीसी का कार्य धर्म प्रसार के साथ साथ सभ्याचार और देश की विरासत को संभालना भी है। एसजीपीसी अगर पर्यावरण पर कार्य कर रही है, शिक्षा में कार्य कर रही है तो देश के नायकों को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिला सकती। एसजीपीसी ने हाल ही में प्राकृतिक आपदा के लिए विंग का गठन किया है।
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