प्रदेश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों के सिविल सर्जन अपने क्षेत्र में जिला कंट्रोल केंद्र स्थापित करें। ताकि समय पर संक्रमित मरीजों को उपचार उपलब्ध हो और मरीजों को किसी भी प्रकार का इंतजार न करना पड़े। मरीजों को सही समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें।
इससे सभी जिलों में उपलब्ध कमरों, मरीजों व होम आइसोलेशन में इलाज करवा रहे मरीजों की जानकारी भी मिल सकेगी। इस केंद्र के लिए अधिकारी भी नामित होगा। इससे मरीजों के उपचार प्रक्रिया पर भी सरकार की पूरी नजर बनी रहेगी, क्योंकि इन केंद्रों के माध्यम से रोजाना डाटा मुख्यालय को भेजा जाएगा।
मंगलवार को मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोविड-19 के नोडल अधिकारियों, मेडिकल कॉलेज के निदेशकों, सभी जिला सिविल सर्जनों व प्रधान मेडिकल अफसरों के साथ समीक्षा बैठक ली। कहा कि मरीजों को समय पर ऑक्सीजन व दवाइयों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल टीम के रूप में कार्य करें, ताकि सभी तृतीय स्तरीय देखभाल संस्थानों में रेफरल मरीजों की देखभाल सुनिश्चित हो सके और कोविड से होने वाली मृत्यु दर में और कमी लाई जा सके। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने जिलों में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति एवं इससे निपटने के लिए अपनाई जा रही व्यापक रणनीतियों की विस्तृत प्रस्तुति दी।
राजीव अरोड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों का पोस्ट कोरोना फोलोअप भी सुनिश्चित करें। सैंपल कलेक्शन सेंटरों पर अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए मरीजों, यात्रा करने वालों तथा नौकरी के लिए भी 72 घंटे पहले टेस्टिंग करवाने वालों के लिए अलग-अलग कलेक्शन सेंटरों की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने चरखी दादरी, कैथल, जींद, फतेहाबाद, एवं पलवल जिलों के अधिकारियों को परीक्षण संग्रहण केंद्र बढ़ाने एवं आरटी-पीसीआर परीक्षण पर अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा कि आरटी-पीसीआर परीक्षण की पूरी क्षमता का उपयोग करने के बाद, रैपिड एंटीजन परीक्षण किट द्वारा परीक्षण को पूरक बनाया जा सकता है।