चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पीड पोस्ट के जरिए भेजी गई वस्तु की डिलिवरी न होने को डाकिया द्वारा दी गई टिप्पणी को गलत करार देते हुए पोस्ट मास्टर चंडीगढ़ को मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपये शिकायकर्ता को अदा करने के आदेश दिए हैं। मामले में शहर के रहने वाले याचिकाकर्ता की ओर से दी गई शिकायत पर आरोपी पक्ष की ओर से पोस्ट मास्टर चंडीगढ़ ने जवाब दिया। उनकी ओर से दिए गए जवाब में यह बात स्वीकार की गई कि भेजी गई वही वस्तु संबंधित डाकिया द्वारा अपूर्ण/अपर्याप्त पता टिप्पणी के साथ प्रेषक को वापस कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले के संबंध में एक जांच की गई और माना गया कि संबंधित डिलीवरी व्यक्ति की ओर से कोई गलती नहीं थी। मामले में सामने आए तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता क पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा भरने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला
शहर के सेक्टर-49ए के रहने वाले प्रेम शंकर अग्रवाल (70) ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष दायर अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने 16 जुलाई 2022 को सेक्टर-48 स्थित उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए एक पत्र बुक कराया था। शिकायतकर्ता की ओर से बुक कराया गया पत्र जिस पते पर जाना था वह सेक्टर-9 यूटी सचिवालय में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी-सह-संयुक्त सचिव संपदा (एस्टेट ऑफिस) कार्यालय के नाम पर भेजा गया था। लेकिन दिए गए पते पर सामान नहीं पहुंचा। शिकायतकर्ता को 20 जुलाई 2022 को इस टिप्पणियों के साथ वापस कर दिया गया कि उनकी ओर से लिखा गया पता अधूरा था, जिस कारण से स्पीड पोस्ट नहीं पहुंच सका। इसके बाद ग्राहक ने सेक्टर-17 स्थित प्रधान डाकघर पोस्टमास्टर को शिकायत दी, जिसमें उन्होंने स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाने वाले पत्र के शुल्क के तौर उनकी ओर से अदा की गई 18 रुपये की राशि वापस करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने उसी पत्र को दिए गए पते पर पहुंचाने में खर्च किए गए 250 रुपये भी वापस मांगे। लेकिन आरोपी पक्षों (पोस्ट मास्टर, प्रधान डाकघर, चंडीगढ़) ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में डाकघर के इस आचरण के चलते हुए उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये के मुआवजे के साथ ही स्पीड पोस्ट शुल्क के लिए दिए 18 रुपये और खर्च किए गए 250 रुपये वापस कराने को लेकर याचिका दायर की थी। वहीं मामले में मामले में सामने आए तथ्यों को जांचने और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने आरोपी पक्ष को शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर भुगतान करने के निर्देश दिए है।