नगर निगम चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने नेताओं को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने चंद्रमुखी शर्मा को निकाल दिया। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी के सबसे करीबी एवं पूर्व पार्षद चंद्रमुखी शर्मा को पार्टी से छह साल के लिए निकाला। कभी चंद्रमुखी शर्मा ही एनएसयूआई का अध्यक्ष रहते हुए छाबड़ा को पार्टी में लाए थे, लेकिन अब छाबड़ा ने ही पार्टी के खिलाफ काम करने पर शर्मा को आउट कर दिया है।
छाबड़ा ने शुक्रवार को सभी 26 उम्मीदवारों को बैठक के लिए बुलाया था, जिसमें पार्षद गुरबख्श रावत को छोड़कर सभी पार्षदों ने भाग लिया। बैठक में एचएस लक्की, रविंदर कौर गुजराज और शशिशंकर तिवारी ने कहा कि पार्टी के खिलाफ काम करने वालों के कारण काफी नुकसान हुआ है तो इस पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने बताया कि चुनाव के समय ही चंद्रमुखी शर्मा को छह साल के लिए निकाल दिया गया है और लिखित में भी उन्हें जानकारी भेज दी गई है।
इस वजह से नाराज थे चंद्रमुखी शर्मा
चंद्रमुखी शर्मा टिकट वितरण के समय उन्हें नजरअंदाज करने से नाराज थे। उन्होंने खुलकर पवन बंसल और छाबड़ा के खिलाफ आरोप लगाए थे। निगम चुनाव में कांग्रेस की हार पर भी चंद्रमुखी ने कहा था कि यह हार कांग्रेस की नहीं, बल्कि बंसल एंड कंपनी की है। चंद्रमुखी शर्मा हर बार वार्ड नंबर-1 से चुनाव लड़ते थे, लेकिन इस बार कांग्रेस ने एचएस लक्की को टिकट दे दी थी।
सूरजमुखी उतरे मैदान में तो कांग्रेस का हुआ नुकसान
कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा
चुनाव में चंद्रमुखी शर्मा के भाई सूरजमुखी शर्मा ने निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ा, जिस कारण कांग्रेस उम्मीदवार एचएस लक्की चुनाव हार गए। सूरजमुखी शर्मा को 1155 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा से करीब 350 वोट से हारे हैं।
इश्यू न बने, इसलिए मीडिया को नहीं दी जानकारी
छाबड़ा का कहना है कि मतदान से पहले ही चंद्रमुखी शर्मा को पार्टी से निकाल दिया गया था। उस समय इश्यू न बने, इसलिए इसकी जानकारी मीडिया को नहीं दी गई थी लेकिन शुक्रवार को अब पार्टी नेताओं को बैठक में इसकी जानकारी दे दी गई है।
प्रक्रिया भूल गए छाबड़ा
कांग्रेस अध्यक्ष छाबड़ा और पवन बंसल ने ही पार्टी को बर्बाद किया हुआ है। जो गुपचुप कर डील करता है, जो अपनी पत्नी को चुनाव नहीं जिता पाया और जिस अध्यक्ष पर पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप लग चुका है वह अब इस तरह की हरकतें कर रहा है। छाबड़ा निकालने की प्रक्रिया भी भूल गए हैं, जिस किसी को पार्टी से निकालना होता है उसे पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। मेरे पास कोई भी चिठ्ठी नहीं आई है। छाबड़ा ने किस अधिकार से मुझे निकाला है।
- चंद्रमुखी शर्मा, पूर्व पार्षद