फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: चढ़ूनी के बयान पर कांग्रेस की चुप्पी, भाजपा और भाकियू हमलावर

विज्ञापन
विज्ञापन
-भाकियू नेता गुरनाम चढ़ूनी ने कहा था कि हमने किसान आंदोलन से कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया
विज्ञापन

-भाजपा बोली- संयुक्त किसान मोर्चा राजनीतिक संगठन, आंदोलन भी राजनीति से प्रेरित

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के बयान के बाद हरियाणा में सियासत गरमा गई है। चढूनी ने कहा था कि किसान आंदोलन में किसानों ने कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया था, लेकिन पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसी के साथ समझौता नहीं किया। इस बयान के बाद से कांग्रेस ने चुप्पी साध ली है और किसी भी नेता ने इसको लेकर टिप्पणी नहीं की, जबकि भाजपा इस मामले को लेकर हमलावर है। भाजपा का कहना है कि अब तस्वीर सामने आ गई है कि किसान आंदोलन के पीछे कांग्रेस की सोच थी। उधर, किसान नेता रतन मान ने भी चढ़ूनी पर निशाना साधा है। मान ने आरोप लगाया कि चढूनी निजी स्वार्थ के लिए किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

बाक्स
आंदोलन को बदनाम न करें चढ़ूनी : मान
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने चढ़ूनी के बयान पर पलटवार किया है। मान ने कहा कि चढूनी अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा के चलते किसान आंदोलन को बदनाम न करें। जब भाकियू का गठन हुआ था तो उसी समय तय हो गया था कि संगठन पूरी तरह से अराजनीतिक है, लेकिन चंद लोग किसानों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं, लेकिन जनता समझदार है, जनता ने उनको आइना दिखा दिया है। ऐसे स्वार्थी लोग किसानों का नुकसान कर सकते हैं और इसलिए इनसे गुमराह होने से बचें। उन्होंने किसानों से अपील की है कि भाकियू थी, है और रहेगी। जल्द ही प्रदेश स्तरीय पंचायत बुलाई जाएगी और आगामी फैसला लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन



कोट
प्रदेश की जनता भाजपा की नीतियों से खुश है, तभी जनता ने तीसरी बार मौका दिया है। किसानों के नाम पर कांग्रेस अपना एजेंडा चलाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जनता ने इसे भी नकार दिया है। अब भाकियू (चढ़ूनी गुट) के अध्यक्ष खुद ये बात कह रहे हैं कि उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया था। अब कांग्रेस नेताओं को इसका जवाब देना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं है, क्योंकि कांग्रेस ने ही इस आंदोलन को कराया था, ताकि प्रदेश में सत्ता हथियाई जा सके। किसानों के साथ-साथ जनता ने उनके षड्यंत्र को नकार दिया। धीरे-धीरे परतें साफ हो रही हैं कि संयुक्त किसान मोर्चा राजनीतिक संगठन है।
-प्रवीन आत्रेय, पूर्व मीडिया सचिव, मुख्यमंत्री।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें