चंडीगढ़। सरकारी भूमि पर पार्षदों, कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए फ्लैट बनाने की निगम की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि कर्मचारियों के लिए तो ठीक है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को फ्लैट देने का क्या औचित्य है। समाज सेवा के लिए प्रतिनिधि बने हैं, न कि अपना पेट भरने के लिए।
नगर निगम सदन की विशेष बैठक में शुक्रवार को पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने कहा था कि नगर निगम की खाली पड़ी भूमि पर पार्षदों, अफसरों और कर्मचारियों के लिए फ्लैट बनाए जा सकते हैं। इसके लिए एक सोसाइटी बनाकर निगम से कलेक्टर रेट पर भूमि ली जा सकती है। निगम के पास ऐसी कोई भूमि नहीं है तो प्रशासन से इसके लिए अपील कर सकते हैं। इस बात पर सदन ने सहमति जताते हुए तीन करोड़ रुपये टोकन मनी के रूप में रख दिए। हालांकि मेयर रविकांत शर्मा ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है कि 2022 तक हर व्यक्ति का अपना घर होना चाहिए।
आईटी पार्क में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने पंजाब-हरियाणा के अफसरों, विधायकों और पीजीआई के डॉक्टरों के लिए 4 बीएचके फ्लैट बनाने की योजना बनाई है। इसी के तहत नगर निगम अपने कर्मचारियों, अफसरों, पार्षदों के लिए आवास की योजना बना सकता है। इस बात पर कांग्रेस पार्षदों ने नाराजगी जताई है।
आप बोली चोर बाजारी, अकाली पार्षद ने कहा-ख्याली पुलाव है योजना:: आम आदमी पार्टी के नेता प्रेम गर्ग ने कहा कि यह सीधे-सीधे चोर बाजारी है। कर्मचारी तो ठीक हैं पार्षदों को घर देने की योजना तो मनमानी है। वहां अकाली पार्षद हरदीप सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को तो योजना के तहत अब तक घर मिले नहीं। नई योजना बनाना शुरू कर दी। ख्याली पुलाव हैं, पकने दीजिये।