2005 में वह कैथल विधानसभा से विधायक बने। सुरजेवाला ने ताउम्र किसानों व कमेरे वर्ग के लोगों के हित में लड़ाई लड़ी। जब भी कांग्रेस का ग्राफ गिरा तो उन्होंने लोगों के बीच में रहकर दोबारा से पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। सुरजेवाला इस बात के उदाहरण रहे हैं कि राजनीति को विनम्रता, सौम्यता, तहजीब के साथ भी संचालित किया जा सकता है। सुरजेवाला बिजली, सिंचाई, वन विभाग और कृषि मंत्री रहे।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दी मुखाग्नि
चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए गोशाला के निकट स्वर्ग आश्रम ले जाया गया। जहां उनके पुत्र रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मुखाग्नि दी। हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
ये रहे मौजूद
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, कर्ण सिंह दलाल, जयप्रकाश, सरदार परमवीर सिंह, बच्चन सिंह आर्य, कुलदीप शर्मा, प्रह्लाद सिंह गिल्लाखेडा, विधायक ईश्वर सिंह, पूर्व विधायक प्रेमलता, पूर्वमंत्री रामभज लोधर समेत कई बड़े नेता अंतिम संस्कार में पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जियालाल गोयल, अनिल आर्य, सज्जन सिंगला, पूर्व पार्षद अशोक कक्कड़, रामपाल उझाना, कर्मबीर सैनी, भरत सिंह मलिक, ईश्वर नैन, भारत भूषण गर्ग, कैलाश सिंगला, सुशील कौशिक सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
खूब रोये सबसे निकटतम साथी लक्ष्मण देव आर्य
पब्लिक धर्मशाला के प्रधान लक्ष्मण देव आर्य चौधरी ने अपने बचपन के दोस्त शमशेर सिंह सुरजेवाला के शव को देखकर खुद को रोक नहीं पाए और खूब रोये। गौरतलब है कि लक्ष्मण देव आर्य सुरजेवाला के राजनीति में आते ही उनके साथ काम करना शुरू कर दिया था। हर दुख-सुख में सुरजेवाला के साथ रहे।