कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में सभी कांग्रेसियों को हिदायत दी थी कि वे अपने हलकों में जाकर पार्टी उम्मीदवार को जिताने के लिए काम करें। लेकिन ज्यादातर हलकों में पार्टी के नेताओं पर इसका कोई असर नहीं हुआ है।
खास बात यह भी है कि प्रदेश में हाईकमान का फरमान जारी करने वाले नेता भी इसका पालन नहीं कर रहे हैं। हाईकमान ने कहा था कि उम्मीदवारों केसाथ न चलने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। पर अभी बहुत से नेता पार्टी उम्मीदवारों केसाथ नहीं चल रहे हैं।
संगरूर में कांग्रेस के चारों विधायक अभी तक गायब हैं। अरविंद खन्ना विदेश में हैं, तो हरचंद कौर प्रचार को नहीं निकली हैं। मोहम्मद सदीक अमृतसर में हैं, जबकि केवल ढिल्लों ने आनंदपुर साहिब हलके में कैंप कर रखा है।
सदीक के पारिवारिक सदस्य जरूर प्रचार में नजर आए हैं। इसी हलके से कांग्रेस की एक और विधायक रजिंदर कौर भट्ठल को कैंपेन कमेटी का चेयरपर्सन बना दिया गया है।
संगरूर में पार्टी उम्मीदवार विजय इंदर सिंगला के चुनाव दफ्तर का उद्घाटन कराने के बाद से वह हलके में नजर नहीं आई हैं। कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी मिलने के बाद से वह दूसरे हलकों में ही हैं।
उधर, पूर्व प्रदेश प्रधान शमशेर सिंह दूलो अभी तक अपने हलकेफतेहगढ़ साहिब में नजर नहीं आए थे। कॉर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने के बाद शनिवार को पहली बार दूलो हलके से पार्टी उम्मीदवार साधू सिंह धरमसोत के हक में नजर आए।
दूलो रविदास बिरादरी से हैं, जिसका इस हलके में बड़ा वोट बैंक है। दूलो का धरमसोत के साथ खुल कर न चलने से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। क्योंकि अकाली उम्मीदवार कुलवंत सिंह रविदास बिरादरी से हैं जबकि, धरमसोत बाजीगर बिरादरी के हैं।
दोनों बार गुरदासपुर आए शकील
पंजाब के प्रभारी शकील अहमद ने कहा था कि आठ अप्रैल के बाद वह पंजाब में ही डेरा डालेंगे। वह तो हुआ नहीं, शकील अब तक सिर्फ दो बार पंजाब आए हैं।
दोनों ही बार वह प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के ही हलके में गए हैं। किसी और उम्मीदवार के हलके में क्राइसिस मैनेजमेंट के लिए शकील अब तक नहीं गए हैं।