पंजाब विधानसभा सेशन शुरू हो चुका है। इसके साथ ही सरकार की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने बड़ा ऐलान किया है। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। यह फैसला सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया। बैठक में सरकार को पूरी प्लानिंग के साथ घेरने की रणनीति बनाई गई।
कांग्रेस ने कई मुद्दों पर अविश्वास प्रस्ताव लाने को नोटिस दे दिया है। इनमें एसवाईएल के मुद्दे पर राज्य के हितों की रक्षा न करना, किसान-मजदूरों के हितों की रक्षा न करने के कारण उनकी आत्महत्याएं, गिरती कानून-व्यवस्था की स्थिति, बढ़ती दलित अत्याचार की घटनाएं, तमाम माफिया पर कोई लगाम नहीं, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बुरी वित्तीय हालत, बेअदबी की घटनाएं न रोक पाना, बहबल कलां में पुलिस फायरिंग में मारे गए युवकों को इंसाफ न मिलना शामिल हैं।
इसके अलावा विपक्ष ने गठबंधन के तीन विधायकों परगट सिंह, इंदरबीर बोलारिया और डॉ. नवजोत कौर पर सार्वजनिक तौर पर सरकार के खिलाफ बगावत को भी मुद्दा बनाया है। सीएलपी की मीटिंग में तय किया गया कि सत्र के दौरान सिर्फ तीन शून्य काल मिलेंगे। इनमें एक-एक मुद्दे पर ही फोकस किया जाएगा। इनमें कानून-व्यवस्था, किसान आत्महत्याएं और शहरों में बुनियादी ढांचे का अभाव शामिल हैं। सात विधायकों को इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनमें चन्नी केअलावा सुनील जाखड़, सुखजिंदर रंधावा, रणदीप नाभा, डॉ. राजकुमार वेरका शामिल हैं। इन्हें कहा गया है कि ये अपने मुद्दों पर पूरा होमवर्क करके ही सदन में आएं, ताकि सरकार पर तीखा हमला किया जा सके।
शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, इसलिए सभी विधायकों को उपस्थिति यकीनी बनाने को भी कहा गया है। वहीं, सुनील जाखड़ भी सत्र के दौरान डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के खिलाफ ब्रीच ऑफ प्रिविलेज मोशन लाएंगे। जाखड़ का आरोप है कि सुखबीर ने पिछले सत्र के दौरान एससी स्कॉलरशिप के मुद्दे पर सदन को गुमराह किया था।