चंडीगढ़ में आरटीपीसीआर टेस्ट पर छिड़ी रार
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आरटीपीसीआर जांच पर चंडीगढ़ में पीजीआई और यूटी प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक दिन में पीजीआई को 600 नमूने जांच के लिए भेजे तो पीजीआई ने 300 से ज्यादा नमूने लेने से मना कर दिया और कहा कि अगले तीन दिन तक नमूने न भेजें। इस पर प्रशासन के अधिकारी खफा हो गए और पीजीआई के इस रवैये की शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय से कर दी। ऐसे में मामले को शांत कराने के लिए यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को दखल देना पड़ा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रशासन को आरटीपीसीआर जांच का शेयर 70 प्रतिशत से ज्यादा करने के निर्देश दिए हैं, जो वर्तमान में 40 फीसदी है। केंद्र के निर्देश के बाद आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने आरटीपीसीआर से ज्यादा नमूने एकत्रित करने शुरू कर दिए और शुक्रवार को 600 नमूने पीजीआई को भेज दिए। पीजीआई ने 300 नमूनों से ज्यादा लेने से मना कर दिया और कहा कि उनके पास क्षमता से अधिक नमूने हैं, इसलिए अगले तीन दिन तक नमूने न भेजें।
पीजीआई का कहना कि उनके पास दो लैब थे, जिन्हें मर्ज कर दिया गया है और उनमें भी पूरी क्षमता से कार्य किया जा रहा है। उधर, पीजीआई के इस रवैये के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने तर्क दिया कि पीजीआई पहले 450 नमूने रोजाना लेता था तो अब वह मना क्यों कर रहा है। इसके बाद सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिख दिया। पत्र में लिखा है कि क्षमता होने के बावजूद पीजीआई ज्यादा जांच करने और सहयोग करने को तैयार नहीं है। देश का प्रतिष्ठित संस्थान अगर इस तरह का रवैया अपनाएगा तो काम कैसे चलेगा।
पीजीआई के अधिकारियों के जैसे ही इस पत्र की भनक लगी, उन्होंने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से संपर्क किया और उन्हें मामले की जानकारी दी। बात यहीं खत्म नहीं हुई। प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा को भी इस मामले में दखल देना पड़ा और पीजीआई के निदेशक प्रो. जगतराम और स्वास्थ्य सचिव से चर्चा करनी पड़ी। प्रशासक ने भी मामले को खत्म कराने का प्रयास किया लेकिन स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है।
जीएमसीएच-32 पर भी उठे सवाल
पीजीआई और प्रशासन के बीच इस विवाद में जीएमसीएच-32 पर भी सवाल उठ गए। आरोप लगाया गया कि जीएमसीएच-32 अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। यहां पर भी आरटीपीसीआर जांच की सुविधा है, लेकिन वह अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि फिलहाल जीएमसीएच-32 में 200 आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा सकते हैं। वायरोलॉजी लैब केवल पीजीआई के पास है। जीएमसीएच-32 में माइक्रोबायोलॉजी लैब है। दो नई मशीनें खरीदने जा रहे हैं। इसके बाद यहां आरटीपीसीआर टेस्टिंग 400 तक पहुंच जाएगी।
पीजीआई के मसले पर उन्होंने कहा कि केंद्र के पास पीजीआई प्रशासन का जवाब भेजा गया है। बाकी मिलजुल कर चंडीगढ़ के लोगों के लिए जांच की क्षमता को बढ़ाएंगे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंजाब के कई मेडिकल कॉलेज चार से पांच हजार नमूनों की जांच कर रहे हैं लेकिन चंडीगढ़ के संस्थानों में इसकी संख्या बेहद कम है। इस वजह से ही ये समस्या आ रही है।
बैठकर मामले का निकालेंगे हल
मामला मेरे संज्ञान में आया है। हम मिलजुल कर इस मुद्दे को हल कर लेंगे। केंद्र सरकार ने आरटीपीसीआर जांच को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। शहर में केंद्र के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। - मनोज परिदा, सलाहकार, यूटी प्रशासक
पूरी क्षमता से कार्य कर रहा पीजीआई
पीजीआई अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रहा है। यहां करीब 1200 आरटीपीसीआर टेस्ट रोजाना करने की सुविधा है। हम पीजीआई आने वाले व अन्य राज्यों के करीब 900 लोगों की जांच करते हैं, इसके बाद 300 नमूने स्वास्थ्य विभाग से लेते हैं। - प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई