मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के मुख्ययमंत्री
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हरियाणा में पिछड़ा वर्ग से संबंधित जातियों को अब पक्के तौर पर नौकरियों और शिक्षा क्षेत्र में आरक्षण की सुविधा मिल गई है। प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से पिछले महीने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लाए गए आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल की मुहर लगने के बाद यह विधेयक कानून बन गया है। माना जा रहा है कि सरकार इसी हफ्ते अध्यादेश भी जारी कर देगी।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने जाटों समेत पांच जातियों को आरक्षण की सुविधा तो दी थी, लेकिन वह फैसला एक प्रशासनिक आदेश के जरिए ही लागू किया गया था। इसके चलते कांग्रेस सरकार के फैसले के न्यायालय में चुनौती दी गई और वह खारिज हो गया। भाजपा सरकार ने पिछड़ा वर्ग की छह जातियों को विधेयक के जरिए आरक्षण देकर इसे कानूनी जामा पहना दिया है।
प्रदेश सरकार की ओर से अध्यादेश जारी किए जाने के साथ ही जाटों समेत छह जातियों को आरक्षण की सुविधा मिलने लगेगी। सरकार की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि अब तक जारी नौकरियों के विज्ञापनों में केवल 90 फीसदी सीटों के लिए ही आवेदन मांगे गए हैं और 10 फीसदी सीटों पर भर्ती राज्यपाल की ओर से विधेयक पर हस्ताक्षर किए जाने तक रोकी गई है। संभव है कि सरकार अध्यादेश जारी करने के साथ ही 10 फीसदी सीटों के लिए भी विज्ञापन जारी कर दे।
सरकार के आरक्षण कानून के मुताबिक, क्लास वन और टू की नौकरियों में पिछड़ा वर्ग-ए को 11 फीसदी, पिछड़ा वर्ग-बी और पिछड़ा वर्ग-सी को 6-6 फीसदी, ईबीसी को 7 और एससी को 20 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। जबकि क्लास थ्री व फोर और शैक्षिक संस्थाओं में पिछड़ा वर्ग-ए को 16 फीसदी, पिछड़ा वर्ग-बी को 11 और पिछड़ा वर्ग-सी को 10 फीसदी, ईबीसी को भी 10 फीसदी और एससी को 20 फीसदी आरक्षण मिलेगा।