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11वीं दाखिले की हजार सीटें बढ़ाने के बाद बच्चे को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने की होड़

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चंडीगढ़। तीसरी काउंसलिंग के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा एक हजार सीटें बढ़ा देने के बाद अभिभावकों में बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की होड़ लग गई है। बता दें इन विद्यार्थियों के अंकों को देखते हुए इन्हें शहर के कॉलोनी और गांवों के स्कूलों में मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कॉलोनी का माहौल सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। खासकर लड़कियों को स्कूल छोड़ने के लिए उन्हें खुद जाना पड़ता है, इसलिए वे चाहते हैं कि बच्चे को किसी सेक्टर के स्कूल में माइग्रेशन देकर दाखिला दे दें। इसके लिए अभिभावक माइग्रेशन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
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शिक्षा विभाग ने इस बार 12,815 सीटों पर चार संकाय कला, विज्ञान, वाणिज्य और वोकेशनल पर दाखिला प्रक्रिया के लिए आवेदन मांगे थे। इसमें तीसरी काउंसलिंग में आर्ट्स और वोकेशनल कोर्स में 350 खाली सीटों पर दाखिला प्रक्रिया की गई। तीसरी काउंसलिंग के बाद भी शहर के सरकारी स्कूलों से पढ़े हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पाया। इसके बाद विभाग ने सरकारी स्कूलों से पढ़े विद्यार्थियों के आवेदन की सूची तैयार कर उन्हें दाखिला देने का फैसला किया। अभी विभाग की तरफ से इन्हीं वंचित विद्यार्थियों का उनके अंकों के अनुसार मेरिट के आधार पर दाखिला किया जा रहा है।
ये है कारण..
शहर के स्कूलों में मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है। इसके लिए विद्यार्थियों से विषय के अनुसार उनके पसंद के पांच स्कूलों की लिस्ट भी मांगी जाती है। लेकिन दसवीं में अधिक अंकों वाले विद्यार्थी को ही उनकी पसंद का मिल पाता है। अन्य कम अंक वाले विद्यार्थियों को जहां सीट खाली रह जाए वहां दाखिला दिया जाता है। ऐसे में शहर के मुख्य सेक्टरों की सीटों पर ज्यादातर अधिक अंकों वाले विद्यार्थी कब्जा कर लेते हैं। कम अंक वाले विद्यार्थियों को कॉलोनी और गांव के स्कूलों में दाखिला दिया जा रहा है। इस कारण कम अंक 40 से 50 प्रतिशत वाले विद्यार्थियों के अभिभावक सेक्टर के स्कूलों में बच्चे का दाखिला चाह रहे हैं। डीईओ दफ्तर पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि शहर की कॉलोनी का माहौल सुरक्षा के ध्यान से ठीक नहीं होता हैं। खासकर लड़कियों को स्कूल छोड़ने के लिए उन्हें खुद आना पड़ता है, इसलिए हम चाहते हैं कि बच्चे को किसी सेक्टर के स्कूल में माइग्रेशन देकर दाखिला दे दें।
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