चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यूटी चंडीगढ़ की पीड़ित सहायता योजना-2018 को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया जा सकता है। दुष्कर्म पीड़िता को योजना के तहत मुआवजे का लाभ दिया जा सकता है, भले ही दोषसिद्धि का निर्णय इसके लागू होने से पहले पारित किया गया हो।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दुष्कर्म पीड़िता ने मुआवजा देने की मांग की थी। याची ने बताया था कि दुष्कर्म के चलते वह गर्भवती हो गई थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य के रूप में ऐसे कानूनों को पूर्वव्यापी प्रभाव दिया जाना चाहिए। योजना का उद्देश्य पीड़ितों को मुआवजा देना है, विशेष रूप से उन लोगों को जिन्होंने जघन्य अपराध झेले हैं। 2018 की योजना का अध्ययन करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह कहीं भी इसकी प्रकृति को भावी या पूर्वव्यापी होने का संकेत नहीं देता है। 2012 की योजना में 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान किया गया है, 2018 की योजना ने सीमा को काफी हद तक बढ़ाकर 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये कर दिया है। पीठ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2012 की योजना में दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई पीड़िता को मुआवजा देने का कोई विशेष प्रावधान नहीं था, जबकि 2018 की योजना ऐसे मामलों में 3 लाख रुपये से 4 लाख रुपये तक का अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करती है।
यह है मामला
पीड़िता ने 2016 में दुष्कर्म की धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई थी। अदालत ने आरोपी को दोषी करार दे कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। याचिकाकर्ता को दुष्कर्म के लिए 10,00,000 रुपये (दस लाख रुपये) तक का मुआवजा दिया जाना चाहिए। पीड़िता को दोषी पर लगाए गए कुल जुर्माने में से ट्रायल कोर्ट की ओर से केवल 1,00,000 रुपये की मामूली राशि दी गई। याचिका का विरोध करते हुए यूटी प्रशासन ने कहा कि आरोपी को वर्ष 2017 में दोषी ठहराया गया था, जबकि वर्ष 2018 की योजना वर्ष 2019 में लागू की गई थी। मुआवजा यह सुनिश्चित करेगा कि याचिकाकर्ता अपनी बेटी को एक स्थिर और पोषण करने वाला वातावरण प्रदान कर सके, जो बाहरी तनावों से मुक्त हो, जो अन्यथा उसके पालन-पोषण में बाधा डाल सकते हैं। यह सहायता उसकी भलाई को बढ़ावा देने में मदद करेगी, जिससे वह अवसरों और देखभाल से भरे भविष्य का पीछा करने में सक्षम होगी।