इसके अलावा घरों में ये कुत्ते मल-मूत्र से भी माहौल पूरी तरह खराब व बदबूदार बना देते हैं। लेकिन ऐसे में अब वे दशकों पुराने अपने पूर्वजों का टोटका अपना रहे हैं। वे घरों के आगे वे नीले, लाल, बैंगनी, गुलाबी व पीले रंग के पानी की बोतलें भरकर दरवाजों के आगे रख अथवा टांग देते हैं। उनका मानना है कि बोतलों में रंगीन पानी को देखकर कुत्ते उनके घरों के आगे खड़े ही नहीं होते। ग्रामीणों ने बताया कि रंगीन पानी से क्यों बचते हैं, ये तो उन्हें नहीं मालूम, लेकिन बरसों से ये टोटका कारगर रहा है।
रंगीन पानी देखकर बंदर भी भागते हैं
ग्रामीण रामचंद्रन ने बताया कि गोवा में केले की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। लेकिन केला उत्पादक किसान बंदरों से बहुत भयभीत रहते हैं, क्योंकि बंदरों की टोली एकदम से केलों के पेड़ों पर धावा बोलते हैं और न केवल केले चट कर जाते हैं, बल्कि काफी केले बर्बाद भी कर देते हैं। इसलिए किसानों ने अब केलों के पेड़ों पर रंगीन पानी बोतलें टांगनी शुरू कर दी है। इन बोतलों को देख बंदर भी डरकर केलों के पेड़ों से दूर रहते हैं।