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ग्राउंड रिपोर्टः किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है बढ़ती ठंड, मौत के सिलसिले में सड़क पर रहना चुनौती

Thu, 17 Dec 2020 02:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत

सार

  • बुजुर्ग किसान ज्यादा होने के कारण ठंड में बीमार बढ़ते जा रहे, पिछले कई दिनों से लगातार हो रही मौत
  • 800 से ज्यादा किसान प्रतिदिन बीमार हो रहे, अब ठंड के कारण खांसी व बुखार के साथ ही सिरदर्द की ज्यादा शिकायत
  • चिकित्सकों की सलाह पूरा शरीर कपड़े से ढककर रखे किसान, कोहरे में घूमने से बचे, बुजुर्गों को हार्टअटैक का ज्यादा खतरा
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आंदोलनरत किसान... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए किसान पिछले 20 दिनों से नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर धरना देकर बैठे हुए हैं। पिछले तीन दिन से ठंड ज्यादा बढ़ने से किसानों को परेशानी होने लगी है। हालात यह है कि किसानों के लिए यह ठंड जानलेवा साबित होने लगी है और पिछले तीन दिन से किसानों की लगातार मौत हो रही है। इसके साथ ही पिछले तीन दिन से प्रतिदिन 800 से ज्यादा किसान बीमार हो रहे हैं। बुजुर्ग किसान ज्यादा होने के कारण ठंड उनके लिए अधिक परेशानी बढ़ा रही है। इस तरह बढ़ती ठंड के बीच किसानों के लिए सड़क पर रहकर खुद को बीमारी से बचाए रखना बड़ी चुनौती है। 

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सिंघु बॉर्डर पर 20 दिन पहले किसानों ने जब धरना शुरू किया था तो उस समय अधिकतम तापमान 27 व न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस था। वहीं अब अधिकतम तापमान 17 व न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके साथ ही शीतलहर चलने के साथ ही कोहरा भी लगातार पड़ रहा है जो बीमार करने के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस तरह के मौसम में चिकित्सक ज्यादा बाहर नहीं निकलने की सलाह देते हैं, लेकिन किसान सड़क पर हैं। उनमें भी अधिकतर बुजुर्ग किसान हैं और उनके लिए बढ़ती ठंड ज्यादा परेशानी करने वाली है। 

सड़क पर उनके पास ठंड से बचने के लिए पूरे संसाधन नहीं है तो ऐसे में खुले में रहने पर हवा व कोहरे का असर ज्यादा रहता है। इस तरह बढ़ रही ठंड किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रही है और पिछले तीन दिन से लगातार किसानों की ठंड में हार्ट अटैक के कारण मौत हो रही है। इसके अलावा प्रतिदिन 800 से ज्यादा किसानों को खांसी व बुखार के साथ ही सिरदर्द की शिकायत हो रही है। वह बिना किसी जांच के केवल दवाई लेकर काम चला रहे हैं जो उनके लिए घातक होता जा रहा है। वहीं यह माना जा रहा है कि आगे ठंड ज्यादा बढ़ेगी और उसमें किसानों के लिए सड़क पर ऐसे रहना किसी चुनौती से कम नहीं है। 
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अस्थमा की बीमारी वालों को हार्टअटैक का ज्यादा खतरा
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. योगेश गोयल बताते हैं कि जिस तरह से ठंड बढ़ी है और कोहरा भी प्रतिदिन हो रहा है। वह बीमारियां भी बहुत अधिक लेकर आया है। इससे लोगों को नुकसान होगा और उसे बीमारियां जकड़ सकती है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। उनके अनुसार आंखों में संक्रमण होने से जलन होती है और लोग चिकित्सकों के पास जाने की जगह उन्हें मसल देते हैं। जिससे वह परेशानी बढ़ जाती है और उससे रोशनी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा अस्थमा की बीमारी वालों के लिए यह ठंड व कोहरा जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि यह सांस के साथ अंदर जाता है और नलियां सिकुड़ जाती हैं। अस्थमा वाले रोगियों को पहले ही सांस लेने में दिक्कत होती है और इससे नलियां सिकुड़ने से सांस नहीं लिया जाता है। इससे खून का प्रवाह भी कम हो जाता है और लो ब्लड प्रेशर वालों को हार्टअटैक हो सकता है। इसके अलावा जुकाम, खांसी, बुखार, सिरदर्द हो जाता है। बच्चों को निमोनिया हो जाता है और उनके लिए भी यह खतरनाक है। 

किसान कंबल ओढ़ने के साथ ही जुराब व दस्ताने जरूर पहनें
डॉ. योगेश गोयल के अनुसार हर किसी को ठंड से बचाव करने के लिए गर्म कपड़े पूरे पहनने चाहिए। ठंडे पानी का सेवन न करें और हमेशा गर्म पानी पीना चाहिए। धुआं व धूल से बचाव करना चाहिए और कोहरे में ज्यादा बाहर नहीं घूमना चाहिए। वहीं जिस तरह से किसान सड़क पर रहते हैं, उनको ज्यादा ध्यान रखना होगा। ठंड में किसानों को पूरे गर्म कपड़े पहनने चाहिए और कंबल ओढ़कर रखना चाहिए। पैरों में जुराब व हाथों में दस्ताने पहनने चाहिए। किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत ही स्वास्थ्य कर्मियों से जांच करानी चाहिए।

कुंडली बॉर्डर पर किसानों के लिए प्रशासन ने काफी व्यवस्थाएं की हुई हैं। उनकी जांच कराई जा रही है तो दवाइयां भी वितरित कराई जा रही है। जिस तरह से ठंड बढ़ रही है तो उनको कपड़ों का पूरा ध्यान रखना चाहिए और ठंड से बचना चाहिए। किसी तरह की बीमारी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए, जिसके लिए वहां स्वास्थ्य विभाग की टीमों को लगाया हुआ है। 
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- श्यामलाल पूनिया, डीसी

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