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Chandigarh News: सहकारिता घोटाले पर सीएम ने मांगी रिपोर्ट, बाहरी एजेंसी से ऑडिट कराएगी सरकार

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भ्रष्टाचार पर मनोहर लाल सख्त, बढ़ेगा जांच का दायरा
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विभाग का दावा, केवल 20 करोड़ खर्च हुए, 100 करोड़ नहीं

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सहकारिता विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने संज्ञान लिया है। उन्होंने सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल से रिपोर्ट तलब की। रविवार देर शाम सहकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि घोटाले में शामिल किसी भी आरोपी अधिकारी और कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही जांच का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने फैसला लिया है कि विभाग में बाहरी एजेंसी से ऑडिट कराया जाएगा।
एंटी कप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सहकारिता विभाग में 100 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़े जाने का दावा किया है, जबकि विभाग इसे 20 करोड़ रुपये तक ही बता रहा है। मुख्यमंत्री के पास पहुंची रिपोर्ट में भी विभाग ने आईसीडीपी योजना के तहत मिली राशि का पूरा ब्योरा दिया है। साथ ही छह जिलों में जारी की गई, खर्च की गई और शेष राशि का ब्योरा दिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्र से विभाग को 61 करोड़ रुपये ही मिले थे, इसमें से मात्र 20.87 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं और शेष 41 करोड़ रुपये बैंक खाते में जमा है।
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तीन और निलंबित, अनु-रोहित को बर्खास्त करने की सिफारिश
घोटाला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने सहकारिता विभाग के तीन और अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें महेंद्रगढ़ के एआर (अतिरिक्त रजिस्ट्रार) सुधीर अहलावत, कैथल के एआर जितेंद्र कौशिक और कृष्ण चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा अनु कौशिश और रोहित गुप्ता पहले से निलंबित चल रहे हैं। विभाग ने इन दोनों को बर्खास्त करने की सिफारिश की हुई है, जबकि सुमित अग्रवाल को बर्खास्त किया जा चुका है। सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार राजेश जोगपाल का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना के बाद कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई जारी है।

चपरासी से लेकर जीएम तक भष्टाचार में शामिल
घोटाले में सहकारिता विभाग के जीएम से लेकर चपरासी तक शामिल रहे। ठेके पर लगे चपरासी पद पर कार्यरत नरेंद्र सिंह ने अनु कौशिश की मिलीभगत से 2019 से 2022 तक अवैध रूप से 8.23 लाख रुपये लिए। इसके अलावा विजय सिंह को नियमों का उल्लंघन कर विकास अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया और उनकी फर्म सरल कोऑपरेटिव को 15 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

कैथल में 4.40 करोड़ नहीं 10.50 करोड़ का गबन
रिमांड के दौरान अतिरिक्त रजिस्ट्रार से पूछताछ में हुआ खुलासा, न्यायिक हिरासत में भेजा
कैथल में पूर्व में कार्यरत एक अन्य आरोपी कृष्ण ने करीब छह करोड़ रुपये का किया गबन

कैथल। घोटाले में गिरफ्तार अतिरिक्त रजिस्ट्रार जितेंद्र कौशिक का रिमांड रविवार को खत्म हो गया। उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले आरोपी से पूछताछ में खुलासा हुआ कि जिले में 4.40 करोड़ नहीं बल्कि 10.50 करोड़ रुपये का गबन किया गया है। एसीबी के अनुसार, जितेंद्र ने माना है कि फर्जी बिल बनाकर उसने सरकारी राशि का गबन किया है। इस मामले में अब 4.40 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि करीब 10.50 करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। कैथल में पूर्व कार्यरत एक अन्य आरोपी कृष्ण ने भी करीब छह करोड़ रुपये का गबन किया है। कैथल एसीबी प्रभारी सूबे सिंह ने बताया कि अब जितेंद्र के बैंक खातों के साथ ही सरकारी खातों का भी मिलान किया जाएगा। संवाद
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किसानों का पैसा मिल-बांटकर खा गए : डॉ. सुशील गुप्ता

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने सहकारिता विभाग में हुए घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि मनोहर सरकार भ्रष्टाचार का गढ़ बन गई है। एक के बाद एक नए घोटाले प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। अब सहकारिता विभाग में किसानों का पैसा नेताओं के संरक्षण में अधिकारी मिल बांटकर खा गए। गुप्ता ने दावा किया कि घोटाले में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की चोरी की पुष्टि हो चुकी है, परंतु यह मामला 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। उन्होंने कहा कि किसानों का पैसा हड़प कर करनाल, जीरकपुर और रेवाड़ी में लग्जरी अपार्टमेंट व फ्लैट खरीदे गए।
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