सीएम ने कहा कि चाहे अध्यापक भर्ती की बात हो, डॉक्टर या इंजीनियर लगाने का मामला हो, लंबी प्लानिंग की आवश्यकता होती है। एक समय था जब इंजीनियर की डिमांड बहुत ज्यादा थी। आज उसमें कमी आई है। आज के दौर में डॉक्टर्स की बहुत अधिक जरूरत है। हालांकि यह पहले भी थी पर आज और भी ज्यादा है। इसलिए अब हम प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने पर अत्याधिक ध्यान दे रहे हैं।
विधायकों की मांगें बजट योजनाओं में होंगी शामिल : सीएम
मनोहर लाल विधायकों की मांगों को बजट योजनाओं में शामिल कराएंगे। उन्होंने विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र की मांगें लिखकर भेजने को कहा है। उन्होंने कहा कि बजट को लेकर विधायकों को कोई सुझाव देना है तो बिंदुवार दें। मांगों को न रखें। मांगें अलग से भेजें, जनहित व पूरा होने वाली मांगों को योजनाओं में शामिल कर पूरा किया जाएगा।
मांगें रखने की नई परंपरा बजट क्लॉज पर चर्चा के दौरान शुरू न करें। हांसी के विधायक विनोद भ्याणा और जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने हांसी को जिला बनाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। भ्याणा ने कहा कि हांसी तो 1857 से पहले जिला था। यह तो 1857 की क्रांति की मार झेल रहा है। कांग्रेस विधायक शमशेर गोगी ने असंध को जिला बनाने की मांग रखी।
अफसरों की कार्यप्रणाली से खफा विधानसभा समितियों के सभापतियों
विधानसभा समितियों के सभापतियों ने गुरुवार को बजट सत्र के अंतिम दिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठाए। अंबाला शहर से विधायक असीम गोयल ने कहा कि अफसर विधानसभा की समितियों को हल्के में लेते हैं। बुलाने पर बहाने बनाते हैं। कुछ तो बहाने ऐसे हैं जो सदन में नहीं बताए जा सकते।
स्पीकर साहब आप तो खुद लोक लेखा समिति के सभापति रहे हैं। अधिकारी समय से जवाब तक नहीं देते, इसलिए बैठकों में शामिल होने व समय से जवाब भेजने के लिए निर्देश जारी करें। गोयल ने स्पीकर ने हर तीन महीने में समितियों के सभापतियों के साथ बैठक करने और सरकार के प्रशासनिक सचिव स्तर के अधिकारियों से हर बैठक की रिपोर्ट लेने का आग्रह किया। विधायक सीमा त्रिखा, हरविंद्र कल्याण ने भी समितियों की बैठक की सिफारिशों पर अमल न होने की बात कही।