लोगों को कुपोषण से मुक्त रखने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की महत्वाकांक्षी ‘राशन डिपो पर गेहूं के बजाय फोर्टिफाइड आटा’ योजना पर अफसरों की लापरवाही हावी है। इसी का नतीजा यह है कि इस परियोजना का विस्तार लेटलतीफी की भेंट चढ़ गया है। सीएम ने निर्देश दिए थे कि अक्तूबर माह से इस योजना का विस्तार करते हुए अंबाला और करनाल जिले में सभी डिपो पर लाभार्थियों को गेहूं के बजाए फोर्टिफाइड आटा वितरित किया जाए। उसके बाद प्रदेश के सभी जिलों को इसमें कवर करना है। उल्लेखनीय है कि इस योजना की शुरुआत दो ब्लॉक नारायणगढ़ और बराड़ा से बतौर पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू की गई थी। इसके बेहतर परिणामों से गदगद मनोहर सरकार ने इस योजना के विस्तार की घोषणा की थी।
सीएम को जांच रिपोर्ट का इंतजार, अफसर लटका रहे
दरअसल, इस योजना को विस्तार 1 जून से होना था। इसके लिए मई में टेंडर भी हुए। लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से शर्तों में फेरबदल कर इनकी री-टेंडरिंग करनी पड़ी। सीएम ने अब इस योजना को अक्तूबर माह से विस्तार करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए अगस्त माह री-टेंडरिंग की गई। लेकिन टेंडरों में गड़बड़झाले की शिकायत मिलने के बाद सीएम ने हैफेड व फूड एंड सप्लाई विभाग के अफसरों की विशेष कमेटी बनाकर उन्हें जांच का जिम्मा सौंपा।
जांच में एक केस सामने भी आया, जिसमें ऐसे व्यक्ति ने टेंडर फाइल किया, जिसकी हरियाणा में न तो फ्लोर मिल है और न ही कोई मशीनरी। जिस ढांचे को टेंडर में दिखाया गया, वे भी निर्माणाधीन है। इसके अलावा जितने भी टेंडर आए उनकी भी फिजिकल जांच विशेष कमेटी ने की। सूत्रों ने बताया कि सीएम और खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री इस संबंध में जांच रिपोर्ट तलब कर चुके हैं, लेकिन जांच पूरी होने के बावजूद अफसरों ने अभी तक जांच रिपोर्ट सीएम व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को पुटअप नहीं की है। इस वजह से अब इस योजना को विस्तार अक्तूबर माह से नहीं हो पाएगा।
वहीं इस मामले में रामनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव, फूड एंड सप्लाई विभाग का कहना है कि, गेहूं की बजाय दो जिलों में फोर्टिफाइड आटा वितरित करने की योजना पर काम चल रहा है। हैफेड के अफसर इसमें जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। सरकार की इस योजना को जल्द क्रियान्वित करवाया जाएगा।