सुखजिंदर सिंह रंधावा व प्रताप सिंह बाजवा।
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सूत्रों के अनुसार हाईकमान तक अब तक पहुंच रहे संदेशों में अधिकतर कार्यकर्ताओं ने मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर ही मुहर लगाई है। वहीं, इस पद के प्रबल दावेदार और प्रदेश कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू अपने पारिवारिक विवाद में उलझने के बाद इन दिनों अपने चुनाव क्षेत्र तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। वे अपने पंजाब मॉडल का भी जिक्र करते हैं लेकिन इन दिनों पार्टी के नेताओं और नीतियों की नुक्ताचीनी करने से बचते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस के लिए किसी भी नेता को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करना आसान दिखाई नहीं दे रहा।
चन्नी और सिद्धू के अलावा उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और सांसद प्रताप बाजवा खुले तौर पर मैदान में आ चुके हैं। ऐसे में अगर हाईकमान चन्नी का नाम घोषित करती है तो सिद्धू के अलावा रंधावा और बाजवा भी फैसले पर सवाल खड़े कर सकते हैं। यह भी पता चला है कि सीएम पद को लेकर सभी दावेदारों ने पार्टी के भीतर धड़ेबंदी शुरू कर दी है। हालांकि इस बार टिकट वितरण में 11 विधायकों के टिकट कट जाने के बाद भी अन्य नेता पार्टी की अंदरूनी खींचतान को तेज कर सकते हैं।
चरणजीत सिंह चन्नी
58 वर्षीय चरणजीत सिंह चन्नी अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने 20 सितंबर, 2021 को पंजाब के मुख्यमंत्री का पद संभाला है। वह सूबे के पहले अनुसूचित जाति के सिख मुख्यमंत्री भी हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री और पीटीयू जालंधर से एमबीए की डिग्री हासिल की है।
वर्तमान में वह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित विषय में पीएचडी कर रहे हैं। 2007 में वह पहली बार चमकौर साहिब सीट से विधायक बने थे। 11 दिसंबर, 2015 से 11 नवंबर 2016 तक वह पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे जबकि 16 मार्च 2017 से 18 सिंतबर 2021 तक कैबिनेट मंत्री रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी को लगभग 111 दिन ही काम करने का मौका मिला लेकिन इस अवधि में भी उन्होंने जनता से जुड़े 100 काम करने का कीर्तिमान बना लिया।
प्रताप सिंह बाजवा
65 वर्षीय प्रताप बाजवा पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। 1976 में डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से छात्र नेता के रूप में राजनीति शुरू करने के बाद 1980 में जिला युवा कांग्रेस गुरदासपुर के अध्यक्ष बने और 1980 में ही युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष, 1982 में युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। बाद में वह पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। बाजवा 1992, 2002 और 2007 में काहनुवान निर्वाचन क्षेत्र से पंजाब विधानसभा के लिए तीन बार चुने गए। चौथी बार उन्होंने 2009 में गुरदासपुर से भाजपा प्रत्याशी विनोद खन्ना को हराया था। 1994 से 2007 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाजवा 2016 से राज्यसभा सांसद हैं।
नवजोत सिंह सिद्धू
58 वर्षीय नवजोत सिंह सिद्धू का राजनीतिक कैरियर बहुत लंबा नहीं है। वह क्रिकेटर के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल करने के बाद सियासत में आए हैं। सिद्धू 2004 में भाजपा में शामिल हुए और उसी वर्ष अमृतसर से चुनाव जीतकर 2014 तक सीट पर बने रहे। इसके बाद उन्होंने अगला चुनाव भी जीता।
2017 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और अमृतसर पूर्व से विधायक बने। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया लेकिन कैप्टन के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं रहे। इस समय वह पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन पहले कैप्टन और अब चन्नी के साथ विभिन्न मुद्दों पर मनमुटाव के चलते सुर्खियों में बने रहे हैं।
सुखजिंदर सिंह रंधावा
63 वर्षीय सुखजिंदर रंधावा पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। उनके पिता संतोख सिंह भी प्रदेश कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे हैं। चंडीगढ़ में 1975 में सरकारी स्कूल से मैट्रिक पास सुखजिंदर रंधावा बीते साल कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे और चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने की सारी कवायद के दौरान मुख्यमंत्री बनने से चूक गए। रंधावा ने पहली बार 2002 में फतेहगढ़ चुड़ियां से चुनाव जीत कर पंजाब विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद वह 2012 और 2017 में नए निर्वाचन क्षेत्र डेरा बाबा नानक से भी चुने गए।