जमीन के सीएलयू के लिए घूसखोरी की शिकायत पर लोकायुक्त की ओर से पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ जारी एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
हरियाणा से जुड़ा यह मामला हुड्डा सरकार के कार्यकाल का है। हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस सिद्धू की एकल बेंच ने अब मामले की सुनवाई 16 फरवरी के लिए स्थगित की गई है।
फैसले के खिलाफ अपील की पैरवी करते हुए पूर्व विधायकों विनोद भ्याणा, राव नरेंद्र सिंह, नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह व राम निवास घोड़िल्ला की ओर से एडवोकेट राजीव आत्मा राम ने पैरवी कर बेंच का ध्यान आकर्षित किया था कि नियमानुसार एफआईआर के लिए प्राथमिक सबूत पुख्ता होता है और सेकेंडरी सबूत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। बेंच को अवगत कराया गया कि इन पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर के लिए सेकेंडरी सबूत ही हैं। जिस सीडी को सबूत मान कर एफआईआर का निर्देश दिया गया, वह भी सेकेंडरी सबूत है।
कहा था कि मामले में प्राथमिक सबूतों में शामिल वह कैमरा और एचडी कार्ड, जो आरोपों की रिकार्डिंग के लिए इस्तेमाल होने की बात कही जा रही है, उन्हें हैदराबाद की फोरेंसिंग लैब ने खाली करार दिया है।
सीडी मुख्य सबूतों से ही बन सकती है, लेकिन जब प्राथमिक सबूत ही नहीं तो सेकेंडरी सबूत सीडी के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। एडवोकेट ने बेंच को बताया था कि इन पांचों विधायकों के संबंध में कंप्यूटर का डाटा दोबारा ढूंढा ही नहीं जा सका। ऐसा हैदराबाद लैब अपनी रिपोर्ट में बता चुकी है।