हरियाणा में 22 साल बाद छात्र संघ चुनाव होने हैं और उन्हें लेकर भी टकराव की स्थिति बन गई है। सरकार और छात्र संघों में चुनाव के तरीके को लेकर विवाद है। छात्र संघ चुनाव को सरकार प्रत्यक्ष रूप यानी वोटिंग सिस्टम से नहीं करवाना चाहती। सरकार चाहती है कि यह चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से करवाए जाएं। ताकि कालेजों व विश्वविद्यालयों में किसी प्रकार की हिंसा की संभावनाएं न रहे। इसके लिए हरियाणा सरकार जरूरी तैयारियों में जुट गई है।
हरियाणा में पहले सन 1987 तक कालेजों व विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनाव बंद थे। लेकिन विभिन्न छात्र संघों के आंदोलन के चलते 1988 में छात्र संघ चुनाव शुरू किए गए। लेकिन सन 1996 में इन चुनावों को फिर से स्थगित कर दिया गया। वजह थी चुनावों के दौरान छात्रों में बढ़ती आपसी रंजिश और हिंसा। विभिन्न कालेजों व विश्वविद्यालयों में ये चुनाव छात्रों की प्रतिष्ठा का सवाल बन जाते थे और छात्रों के गुटों में खूनी संघर्ष तक हो जाता था।
इसी बढ़ती हिंसा को देखते हुए तत्कालीन सीएम बंसी लाल के कार्यकाल में सन 1996 में चुनाव अंतिम बार हुए और उसके बाद स्थगित कर दिए गए। तभी से छात्र संघ नेता चुनाव बहाली को लेकर संघर्ष कर रहे थे। अब मनोहर सरकार ने इन चुनावों की बहाली की घोषणा कर दी है। आगामी सितंबर व अक्तूबर में ये चुनाव प्रस्तावित है। लेकिन सरकार चाहती है कि यह चुनाव प्रत्यक्ष रूप से न हो, बल्कि अप्रत्यक्ष हो।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि कालेजों में चुनाव प्रत्यक्ष रूप से हों, फिलहाल सरकार ऐसा नहीं चाहती है। क्योंकि सरकार को इस चुनाव के बहाने होने वाली हिंसा की चिंता है। कालेजों में माहौल न बिगड़े, इसलिए सरकार विचार कर रही है कि ये चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से हों। अप्रत्यक्ष रूप से भी चुनाव प्रक्रिया अच्छे ढंग से हो सकती है और कई अच्छे युवा नेता सामने आ सकते हैं।
हमने सीएम से मुलाकात कर उन्हें प्रत्यक्ष रूप से ही चुनाव करवाने की मांग की है। सीएम मनोहर लाल ने भी उन्हें आश्वस्त किया है कि सरकार प्रत्यक्ष रूप से चुनाव करवाने पर विचार करेगी। चुनाव अन्य राज्यों की तरह प्रत्यक्ष रूप से ही होने चाहिए।
- सुनील भारद्वाज, प्रदेश सचिव, अभाविप हरियाणा
हरियाणा सरकार यदि अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव करवाती है तो छात्र फिर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। सरकार की मंशा छात्र संघ चुनाव करवाने की है ही नहीं, चुनाव करवाने की घोषणा तो सरकार ने इनेसो की 5 अगस्त को होने वाली कैथल रैली के दबाव में आकर की है। सरकार अन्य राज्यों की तरह प्रत्यक्ष रूप से चुनाव करवाए।
- दिग्विजय चौटाला, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इनेसो