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नगर निगम में ग्राम पंचायतों का विलय तय, चुनाव पर यूटी प्रशासन व इलेक्शन कमीशन में मतभेद

Sat, 20 Oct 2018 02:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंचायत चुनाव
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चंडीगढ़ की 12 ग्राम पंचायतों का नगर निगम में विलय तो लगभग तय है, लेकिन पंचायत चुनाव पर यूटी प्रशासन और इलेक्शन कमीशन के बीच मतभेद की स्थिति है। यूटी प्रशासन सभी गांवों का निगम में विलय दो माह में करने को तैयार है जबकि इससे इतर इलेक्शन कमीशन का कहना है कि इस काम में लगभग दो साल का समय लग जाएगा। फिलहाल पंचायत इलेक्शन कराने को लेकर यूटी का पंचायत विभाग लीगल ओपिनियन ले रहा है। यूटी प्रशासन ने इस मसले पर स्टेक होल्डर्स की भी राय लेने की योजना बनाई है। हाल ही में इलेक्शन कमीशन ने यूटी प्रशासन को उन 13 गांवों में पंचायत चुनाव कराने को लिखा है जिनका नगर निगम में मर्जर होना लगभग तय हो गया है।
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यूटी प्रशासन के होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता ने दावा किया है कि दो महीने में गांवों के मर्जर का प्रोसेस पूरा कर दिया जाएगा लेकिन इलेक्शन कमीशन को इस पर संदेह है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया दो साल से भी ज्यादा समय तक चलेगी। यह भी कहा जा रहा है कि मर्जर के बाद यहां बीडीपीओ के हवाले गांव कर दिए जाएंगे लेकिन अभी इसको लेकर ऊहापोह की स्थिति है। इन गांवों में किशनगढ़, मौलीजागरां, दड़वा, रायपुरकलां, मक्खन माजरा, बहलाना, रायपुर खुर्द, धनास, सारंगपुर, खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला, खुड्डा लहौरा और खुड्डा जस्सू गांव शामिल हैं।

निगम में शामिल होंगे सभी गांव
प्रशासक की हरी झंडी के बाद पंचायत विभाग ने 13 गांवों को यूनिसिपल कारपोरेशन में शामिल करने का फाइनल फैसला कर लिया है। निगम के चुनाव वर्ष 2021 में होने हैं। लेकिन इन 13 गांवों में चुनाव दिसंबर 2018 में होने हैं। प्रशासन ने इसके लिए बाकायदा नोटीफिकेशन जारी कर दिया। पहले इलेक्शन ईवीएम मशीन से कराने का नोटिस प्रशासन ने जारी किया। इसके कुछ दिनों बाद तय हुआ कि पंचायत इलेक्शन बैलेट पेपर से कराए जाएंगे।
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ओपिनियन के बाद ही लिया जाएगा निर्णय
पंचायत सेक्रेटरी अजय कुमार सिंगला के मुताबिक पंचायत चुनाव कराने को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है। हम कानूनी राय ले रहे हैं। पब्लिक ओपिनियन लेने की भी योजना है। इसके बाद ही कोई फाइनल फैसला होगा। इलेक्शन कमीशन तो चुनाव चाहता है। लेकिन अभी कानूनी सलाह ली जाएगी। इसके बाद  पब्लिक ओपिनियन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हम इसके बाद मामला प्रशासक  के पास भेज देंगे। उन्होंने बताया कि गांवों की आबादी 50 हजार से ऊपर है। यहां वार्ड बंदी के अलावा डी-लिमिटेशन की प्रक्रिया पूरी की जानी है। लाल डोरे के मसले को निपटाना है।
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