माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। एमबीबीएस के बाद जीएमसीएच-32 में एमडी-एमएस करने की तैयारी कर रहे मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। पीजी सीटों में यूटी चंडीगढ़ पूल की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर मेयर सौरभ जोशी ने पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखा है। उन्होंने आगामी पीजी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले पात्रता नियम स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि नीट-पीजी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अंतिम समय में असमंजस का सामना न करना पड़े।
अभिभावक डॉ. शेफाली शर्मा ने कहा कि जीएमसीएच-32 में करीब 25 प्रतिशत सीटें यूटी पूल से जुड़ी हैं, लेकिन हर बार पात्रता को लेकर कोई न कोई मामला सामने आ जाता है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह चंडीगढ़ के विद्यार्थियों के अवसर से जुड़ा मामला है और कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
डॉ. दीपक बंसल ने पंजाब और हरियाणा में डोमिसाइल से जुड़े नियमों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के कई बच्चे ऑल इंडिया एडमिशन प्रक्रिया के तहत दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को पीजी के समय चंडीगढ़ से जुड़े अपने पात्रता अधिकार की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। वहीं डॉ. अभिलाषा के मुताबिक, विद्यार्थी कई साल तक नीट-पीजी की तैयारी करते हैं। ऐसे में प्रवेश के समय नियम बदलने या पात्रता स्पष्ट नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती है। नियम पहले से तय और स्पष्ट होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी उसी के अनुसार अपने विकल्प तय कर सकें।
10 साल की स्कूली शिक्षा का सुझाव
मेयर ने पत्र में जीएमसीएच-32 की विशेषज्ञ समिति की उस सिफारिश का भी उल्लेख किया है, जिसमें यूटी पूल के लिए 10 साल की स्कूली शिक्षा को पात्रता का आधार बनाने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से इस सिफारिश की कानूनी और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप जांच कर निर्णय लेने को कहा है। मेयर ने कहा कि नीट-पीजी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता स्पष्ट करना छात्रों और परिवारों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। इसलिए नियम पहले ही स्पष्ट किए जाएं।