चंडीगढ़। उद्घाटन के समय सेक्टर-34 स्थित आयुष अस्पताल में मरीजों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं देने के बड़े दावे किए गए थे, लेकिन डेढ़ महीने में ही कई दावों की हकीकत सामने आने लगी है। अगस्त के अंत तक सुबह 8 से रात 8 बजे तक एलोपैथी ओपीडी चलाने का दावा किया गया था, लेकिन मरीजों के मुताबिक दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिल रहे। भर्ती मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था नहीं है। जांच के लिए मरीजों को बाहर भेजा जा रहा है और जरूरी दवाएं भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, क्षारसूत्र की ओटी में तीन सर्जरी के बाद काम बंद हो गया।
अस्पताल में फिलहाल छह मरीज भर्ती हैं। पंचकर्म के लिए भर्ती मरीजों को डाइट उपलब्ध कराने की अभी तक पुख्ता व्यवस्था नहीं हो पाई है। बेडशीट और अस्पताल के दूसरे कपड़ों की धुलाई के लिए भी बड़ी व्यवस्था की जगह छोटी वॉशिंग मशीन से काम चलाया जा रहा है।
तीन ऑपरेशन के बाद बंद हुई क्षारसूत्र ओटी
अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर बनी क्षारसूत्र ओटी में तीन मरीजों की सर्जरी की गई। इसके बाद इसी जगह एलोपैथी ओपीडी शुरू कर दी गई। अब क्षारसूत्र उपचार के लिए पहली मंजिल पर नई ओटी तैयार की जा रही है। इसका असर मरीजों पर पड़ रहा है। 22 मरीज सर्जरी के लिए ओटी तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं।
75 मरीजों ने कराया पंचकर्म, 334 पंजीकरण
अस्पताल शुरू होने के बाद अब तक 75 मरीज पंचकर्म करा चुके हैं, जबकि 334 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। उपलब्धता के अनुसार मरीजों को स्लॉट दिए जा रहे हैं। रोजाना करीब 22 से 24 मरीजों को थेरेपी दी जा रही है। योग की सुविधा नियमित चल रही है। योग प्रशिक्षक दो पालियों में ओपीडी में आने वाले मरीजों को योग के जरिए स्वस्थ रहने के तरीके बता रहे हैं। आसपास के लोग भी इसका लाभ उठा रहे हैं।
इलाज अस्पताल में, जांच के लिए बाहर
अस्पताल की जांच व्यवस्था भी अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। लैब में सुबह करीब एक घंटे ही सैंपल कलेक्शन हो रहा है। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से मरीजों को दूसरे सरकारी या निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। सभी जरूरी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पंचकर्म और क्षारसूत्र समेत कई उपचारों में जांच रिपोर्ट जरूरी होती है।
एक महीने में चार डॉक्टर बदले, मरीज परेशान
सेक्टर-34 की पूनम कुमारी अस्पताल शुरू होने के बाद इलाज के लिए पहुंचीं। बुधवार को फॉलोअप के लिए आईं तो पता चला कि जिस डॉक्टर को वह दिखा रही थीं, उनकी नाइट ड्यूटी है। पूनम के मुताबिक, एक महीने में वह चार अलग-अलग डॉक्टरों को दिखा चुकी हैं। पहली बार इलाज करने वाले डॉक्टर दोबारा नहीं मिले। उनका कहना है कि हर बार नया डॉक्टर अलग दवा लिख देता है, जिससे इलाज को लेकर असमंजस बढ़ रहा है। अब वह दूसरे अस्पताल में इलाज कराने पर विचार कर रही हैं। उनका कहना है कि मरीज के इलाज में डॉक्टरों की निरंतरता जरूरी है।
कोट-
हमारा प्रयास है कि मरीजों को समुचित इलाज की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो। जीएमसीएच-32 से भर्ती मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना है। जल्द ही ये सुविधा शुरू हो जाएगी। -डॉ. नरेन्द्र सिंह भारद्वाज, संयुक्त निदेशक आयुष