आम आदमी पार्टी के नेता सुखपाल खैरा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से इराक में फंसे 39 पंजाबियों के जीवित होने के दावे झूठे हैं। इस मामले में आतंकियों से चंगुल से बच कर लौटे एकमात्र युवक हरजीत मसीह निवासी काला अफगाना ने कहा है कि सभी 39 युवकों को आतंकियों ने मार दिया। जबकि, सुषमा बार-बार बयान दे रही हैं कि सभी पंजाबी जीवित हैं। दो साल से केंद्र सरकार यही राग अलाप रही है कि सभी सही-सलामत हैं।
खैरा के निवास पर प्रेस कांफ्रेंस में हरजीत मसीह ने बताया कि आतंकियों ने उसके सामने ही 39 नौजवानों को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया था। वह इसलिए बच गया क्योंकि जैसे ही गोलियां चलनी शुरू हुईं, वह नीचे लेट गया, एक भारी व्यक्ति की ओट में होने केकारण बच गया। मसीह ने बताया कि उसके समेत सभी चालीस भारतीय मौसूल शहर में एक कंपनी में काम करते थे, जहां काफी बांग्लादेशी भी थे।
आतंकवादी सभी को अगवा करके एक पहाड़ी पर ले गए। जहां भारतीयों और बांग्लादेशियों को अलग कर दिया गया और कतार में खड़ा करके गोलियां दाग दी गईं। पंद्रह मिनट बाद उसे होश आया तो उसने अपने दोस्तों को पुकारा, पर किसी ने जवाब नहीं दिया। वह किसी अंजान रास्ते पर चलता रहा और दोबारा आतंकियों के चंगुल में फंस गया। उसने यह कह कर जान बचाई कि वह बांग्लादेशी है। फिर आतंकियों ने उसे फैक्ट्री भेजने का प्रबंध कर दिया।
जहां से वह भारतीय एंबेसी पहुंच गया और भारत आया। यहां एक साल तक खुफिया एजेंसियों ने उसे अलग-अलग जगहों पर रखा। मसीह ने कहा कि वह 39 भारतीयों की हत्या का चश्मदीद गवाह है, फिर भी भारत सरकार मान कर चल रही है कि वे जीवित हैं।
खैरा ने कहा कि केंद्र सरकार ने नौजवानों के परिजनों से फोन पर उनकी बात कराने की कोशिश तक नहीं की। बेहतर है कि केंद्र इस मामले में असलियत बयान कर दे ताकि परिजन यह स्वीकार कर लें कि नौजवान अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र हर परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा और सभी मेंबरों को सरकारी नौकरी दे।