अब चंडीगढ़ और आसपास के राज्यों में जल्द ही ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट आएगा। जी हां, सिटी में शुरुआत की गई है आईजीबीसी की। आईजीबीसी ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को प्रमोट करेगा।
यहां कई गतिविधियां होंगी और जल्द ही स्टूडेंट चैप्टर की लांचिंग भी की जाएगी। कंफेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री के नॉर्दर्न रीजन हेडक्वार्टर सेक्टर-31 ए में सीआईआई-इंडिया ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल चंडीगढ़ चैप्टर की लांचिंग की गई। चैप्टर में कुल 24 सदस्य हैं।
इसके चेयरमैन एके जसवाल हैं। इंडिया ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल चंडीगढ़ चैप्टर में एक ही ढंग के स्टेकहोल्डर हैं। यही सदस्य मिलकर चंडीगढ़ में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट चलाएंगे।
यह सदस्य चंडीगढ़ प्रशासन, लोकल गवर्नमेंट एजेंसी मसलन पंजाब अर्बन डवलपमेंट अथारिटी, हरियाणा अर्बन डवलपमेंट अथारिटी, पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट कारपोरेशन, पंजाब एंड हरियाणा वाटर सप्लाई बोर्ड में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को साझा करेंगे।
यह चैप्टर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को प्रमोट करेगा। यहां ग्रीन वाकाथान, साइकिल रैली, पौध रोपड़ की गतिविधियां की जाएंगी। आईजीबीसी के चेयरमैन डा. प्रेम सी जैन ने कहा कि आईजीबीसी का उद्देश्य पूरे देश में प्रकृति को घर तक लाना है।
इस उद्देश्य के लिए देश में खोला गया यह 15वां चैप्टर है। जिसको चंडीगढ़ में लांच किया गया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि पांच महीने के भीतर सौ सदस्य बनाएं। यह सदस्य ही ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को आगे बढ़ाएंगे। जल्द ही चंडीगढ़ में स्टूडेंट चैप्टर को भी खोला जाएगा। जिसके माध्यम से युवाओं के बीच पहुंचा जा सके जो कि देश के युवा हैं।
आईजीबीसी का गठन 2001 में किया गया। जिसका उद्देश्य वर्ष 2025 तक बेहतर वातावरण तैयार करना है। इसका उद्देश्य सौ बिलियन स्क्वैयर फीट एरिया कवर करना है। अभी सिर्फ दो बिलियन स्क्वैयर फीट एरिया कवर किया जा रहा है।
पंजाब एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी के निर्देशक बलौर सिंह ने कहा कि पंजाब ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को प्रमोट करने में अहम भूमिका निभा रहा है। पंजाब में सूर्य, पानी और अन्य प्राकृतिक ऊर्जा के संसाधनों का भरपूर उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब का उद्देश्य है कि अक्षय ऊर्जा की मदद से ज्यादा से ज्यादा पावर जनरेशन किया जाए। इसके लिए अगले दो वर्ष में 2800 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट का लक्ष्य रखा गया है। इसके माध्यम से 2400 मेगावाट पावर जनरेशन को बढ़ाया जा सकेगा।
सीआईआई गोदरेज जीबीसी के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर एस रघुपति ने कहा कि हमको बेस्ट एनर्जी सेविंग प्रेक्टिस को अपनाना चाहिए। इसमें बेसमेंट एरिया में सन पाइप, पैकेज्ड सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, वर्टिकल ग्रीन वाल, ग्रीन रूफटाप, नेट जीरो एनर्जी बिल्ंिडग जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को सिंगापुर से सबक लेना चाहिए। सिंगापुर में ग्रीन एरिया कवर 49 फीसदी है। इसके लिए हमको 30-35 फीससदी तक ग्रीन कवर को बढ़ाना होगा। भारत में 2430 आईजीबीसी रजिस्टर्ड ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट हैं। जो 2.02 बिलियन स्क्वैयर फीट एरिया को कवर करते हैं। देश को टाप थ्री कंट्री में लाने के लिए यह कवर बढ़ाना होगा।
सीआईआई आईजीबीसी चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन एके जसवाल ने कहा कि सीआईआई की ग्रीीन बिल्डिंग काउंसिल देशभर में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को चला रही है।
आईजीबीसी ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट का उद्देश्य है कि लोकल चैप्टर के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा कि एनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड को भारत में लागू किया जा सके, तभी एनओसी दी जाए।
सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के चेयरमैन दर्पण कपूर ने कहा कि आज हम हरियाली की ओर जा रहे हैं। सुरक्षित भविष्य के लिए यह आवश्यक है। इकोलॉजी के लिए ग्रीन बिल्डिंग सबसे आवश्यक हैं। आईजीबीसी सभी के सहयोग से काम करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2025 तक ग्लोबल लीडर बनाने के लिए यह शुरुआत की गई है।
सीआईआई नार्दर्न रीजन के रीजनल डायरेक्टर पिकेंदर पाल सिंह ने कहा कि सीआईआई की कोशिश है कि चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाया जा सके।
उसको विकास की अगली सीढ़ी पर लाएं, ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को डवलप करें। इसके लिए यह एक नई शुरुआत है। इसके लिए ही यहां पर कांफ्रेंस और अन्य माध्यमों को अपनाया जाएगा।