चंडीगढ़। सेक्टर-17 स्थित परेड ग्राउंड में शुक्रवार को 26वें सीआईआई फेयर की शुरुआत हो गई। इसका उद्घाटन पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने किया। फेयर में बॉलीवुड-पाकिस्तानी सूट से लेकर राजस्थानी पापड़ और अफगानी ड्राई फ्रूट भी मौजूद है। यहां सुई से लेकर कार तक की खरीदारी की जा सकती है। फेयर छह नवंबर तक सुबह 10 बजे से लेकर रात 8 बजे तक चलेगा। लोगों को एंट्री के लिए 50 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।फेयर में मुख्य रूप से तीन हाल हैं। जहां लोगों के लिए अलग-अलग सामानों के स्टॉल्स लगाए गए हैं। हाल के बाहर विभिन्न कार व बाइक कंपनियों ने अपनी गाड़ियों को प्रदर्शित किया है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल है। कई नई कंपनियों की गाड़ियां भी इस फेयर में आई हैं। पहले हाल में एंट्री करते ही सबसे पहले विशेष आर्ट आइटम्स का स्टॉल्स है। इस हाल में बॉलीवुड सूट से लेकर थाईलैंड फुटवियर और इंडियन हैंडीक्राफ्ट मौजूद है। सहारनपुर के फर्नीचरों का भी एक स्टॉल है, जिसकी कीमत हजारों में है। दूसरे हॉल में खाने के उत्पादों के स्टॉल ज्यादा है। इसमें राजस्थानी पापड़ से लेकर आचार और अन्य है। दूध, दही, घी, अचार, चिप्स, मसाले समेत अन्य के स्टॉल हैं। इसके अलावा पंजाब, आगरा, कश्मीरी, अफगानी ड्राई फ्रूट्स भी हैं। तीसरे हॉल में देश के विभिन्न राज्यों से आए दुकानदार हैं, जिनके स्टॉल्स में हाथ से बने सामान मौजूद हैं। इसमें लकड़ी, कपड़े और जूट के डिजाइनदार बैग आदि हैं।
नए उद्यमियों के लिए यह अच्छा प्लेटफॉर्म
पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने फेयर का उद्घाटन करने के बाद दौरा किया। वो विभिन्न स्टॉल्स पर गए और दुकानदारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को वहां के उद्योग आगे लेकर जाते हैं। चंडीगढ़ दो राज्यों की राजधानी हैं। यहां सभी आते हैं। ऐसे फेयर की वजह से नए उद्यमियों को भी एक जगह मिलती है, जहां वो अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर पाते हैं। चार दिनों में करीब 60-65 लोग पहुंचते हैं। ये सभी के लिए एक बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म है। उन्होंने कहा कि पंजाब उद्योगों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है, इसलिए पिछले एक-डेढ़ साल में पंजाब में करीब 50 हजार करोड़ निवेश हुए हैं। टाटा स्टील का प्लांट भी पंजाब में आ रहा है।
कुछ साल में पराली ढूंढने से मिलेगी नहींः अमन अरोड़ा
दिल्ली में प्रदूषण के मुद्दे पर अमन अरोड़ा ने कहा कि पिछले वर्षों के मुकाबले पराली जलाने के मामले 50 फीसदी तक कम हुए हैं। किसानों को जागरूक किया गया है। पराली के मुद्दे पर अब तक किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया था। पंजाब की मान सरकार किसानों को मशीनें देकर मदद कर रही है। उन्हें जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी किसान पराली से पीछा छुड़ाना चाहते हैं लेकिन आने वाले कुछ सालों में पराली ढूंढने से नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि पराली से किसान पैसा कमाएंगे। इससे कंप्रेस्ड बायोगैस, सीएनजी, पावर और ग्रीन हाइड्रोजन बनेगा लेकिन वो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में तीन-चार साल लगेंगे।