राहत एवं बचाव कार्य में लगी जेसीबी
अधिकारियों के समक्ष बड़ी चुनौती बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए तकनीक अपनाने की रही। डीसी-एसपी के साथ आर्मी के अधिकारी करीब डेढ़ घंटे तक सलाह-मशविरा करते रहे। बीच-बीच में अधिकारी बोरवेल के पास जाकर बच्चे के रोने की आवाज सुनते रहे, ताकि बच्चे की स्थिति को समझा जा सके।
इसी बीच हिसार से बोरवेल खुदाई करने वाली मशीन मंगवाई गई। मशीन आने में देरी होत देख आखिरकार 8 बजकर 41 मिनट पर जेसीबी से बोरवेल के साथ 15 मीटर दूर से जगह खोदनी शुरू की गई। कुछ देर बाद एक और मशीन मंगवाई गई। इस तरह खुदाई में चार जेसीबी लगाई गईं।
10 दिन पहले पंचायती जमीन पर तेलूराम ने खुदवाया था बोरवेल
ग्रामीणों के अनुसार जिस जगह पर बोरवेल खोदा गया है, वह पंचायती जमीन है। बोरवेल गांव के तेलूराम ने दस दिन पहले खुदवाया है। बोरवेल को खोदने के बाद खुला छोड़ दिया गया। न तो उसे ढका गया और न ही सुरक्षा के अन्य प्रबंध किए गए।
ज्यों-ज्यों घटना की जानकारी मिलती गई, त्यों-त्यों लोगों का जमावड़ा ढाणी में लगता रहा। सैकड़ों की संख्या में आसपास के लोग वहां पहुंच गए। इस कारण पुलिस ने सबसे पहले रस्सा बांधकर बोरवेल की जगह से आसपास के ग्रामीणों को करीब एक एकड़ की दूरी पर खड़ा किया। किसी को भी बोरवेल के नजदीक नहीं जाने दिया गया। यहां तक की परिजनों को भी रोक दिया गया।
पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है नदीम
ढाणी निवासी आजम खान चिनाई मिस्त्री का काम करता है। पहले वह ईरान में काम करता था। तीन साल से यहीं रह रहा है। उसकी तीन बेटी व दो बेटे हैं। बड़ा बेटा 12 वर्षीय समीर खान दिव्यांग हैं, जबकि बड़ी बेटी आईना 14 साल की है। आइसा आठ साल और साजिदा पांच साल की है। जिस समय हादसा हुआ, उस समय आजम काम पर गया था, जबकि अन्य परिजन ढाणी में काम पर लगे थे।
पाइप से की ऑक्सीजन की व्यवस्था
बोरवेल में गिरे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ न हो, इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 6:20 बजे एक पाइप बोरवेल में डालकर ऑक्सीजन सिलिंडर से जोड़ा। इस तरह संकरे बोरवेल में फंसे बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाइ जा रही है।
ढाणी के पास में ही बेर का पेड़ है। उसके पास ही बोरवेल खोदा गया था। नदीम की मां व अन्य बच्चे बेर खाने चले गए। साथ ही अंगुली पकड़कर नदीम भी चला आया। इसी बीच वह बोरवेल में गिर गया। फोन पर मुझे जानकारी मिली तो मैं तुरंत ढाणी आया। -आजम खान, मासूम नदीम के पिता।
बच्चे के बोरवेल में गिरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच गई। आर्मी की भी मदद ली गई है। आर्मी ने पूरा प्लान बनाकर जेसीबी से खुदाई शुरू करवा दी। बच्चे को सुरक्षित बोरवेल से बाहर निकालना ही हमारे लिए प्राथमिकता है। उसके बाद जांच होगी कि घटनाक्रम कैसे हुआ। - अशोक कुमार मीणा, उपायुक्त, हिसार
बुधवार देर रात करीब 11 बजे गाजियाबाद से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। टीम के 10 से 12 सदस्यों ने पहले पूरे हालात का जायजा लिया। इसके बाद सेना के जवानों के साथ इस टीम के सदस्य भी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए।
बीएसएफ ने लीड किया अभियान
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के नेतृत्व में यह पूरा बचाव अभियान चलाया गया। इस दौरान बल के 25 जवान बचाव कार्य में लगे रहे। जबकि 20 जवानों को रिजर्व में रखा गया। इसके अलावा सदर थाना पुलिस और बालसमंद पुलिस चौकी के 40 पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे।
लाइट के लिए लेकर आए दो जेनरेटर
खेतों में लाइट की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रशासन ने मौके पर दो बड़े जेनरेटर मंगवाए। इन जेनरेटरों के सहारे मर्करी और बड़ी लाइटों से रोशनी की गई। उसके बाद नदीम को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन आगे बढ़ाया गया।
बीएसएफ और एनडीआरएफ की टीम द्वारा मोर्चा संभालने के बाद डीसी अशोक मीणा और एसपी शिवचरण रात 11 बजकर 20 मिनट पर घटनास्थल से चले गए। हालांकि दोनों अधिकारियों ने बच्चे के सुरक्षित बाहर निकलते ही तुरंत सूचना देने के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए।
मां बोलीं- ऊपर वाले से यही दुआ, बस मेरा बेटा सुरक्षित बाहर आ जाए
बोरवेल में गिरे मासूम नदीम की मां गुलशन ने बताया कि बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर मैं दौड़कर वहां गई। बच्चों ने बताया कि नदीम बोरवेल में गिर गया। मैंने झांककर आवाज लगाई तो नदीम के रोने की आवाज आई। इसके बाद परिजनों ने मुझे ढाणी में भेज दिया। ऊपर वाले से यही दुआ है कि मेरा बेटा सुरक्षित बोरवेल से बाहर आ जाए। रात 11:34 बजे तक 22 फुट गड्ढा खोदा जा चुका है।
जब तक बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं आ जाता, तब तक पूरा गांव नहीं मनाएगा होली
बालसमंद गांव के सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र सिंह का कहना है कि मुझे घटना के 10 मिनट बाद मामले की सूचना मिल गई थी और मैं तुरंत मौके पर पहुंच गया था। बच्चे के लिए दो बार दूध भेजा गया लेकिन बच्चा दोनों बार सोया हुआ मिला। जब तक बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं आएगा, तब तक पूरा गांव होली नहीं मनाएगा।