ये है गांव बनियानी का एक साधारण सा घर। बाहर चार फीट की दीवारें, जिनमें दरारें हैं। ईंटें उखड़ी हुई। घर पर पीला रंगा, वह भी धुंधला। बस रंग का आभास ही हो रहा है। बाहर खुली नालियों में जमा कचरा व फैली गंदगी। घर के बाहर हमेशा सन्नाटा रहता है, लेकिन मंगलवार को यहां का माहौल दूसरा ही था। हर तरफ उड़ता गुलाल और बजते ढोल नगाड़ों और डीजे पर झूमते लोग।
आंगन में अक्सर अकेला खड़ा रहने वाला नीम का पेड़ भी यहां बदले माहौल को देख झूम रहा था। यह सब देखकर ही अहसास हो रहा था कि इस जर्जर से घर में आज कुछ खास है। हो भी क्यों न हो, यह घर प्रदेश के भावी मुखिया का जो है।
यहीं खेल कूदकर बड़े हुए खट्टर
मनोहर लाल खट्टर इसी मकान में रहते थे। यहीं खेल कूदकर बड़े हुए। भले ही वे भाजपा में बड़े पद पर रहे और आरएसएस में ऊंचे ओहदे तक पहुंचे, लेकिन उनकी सादगी और संघर्षमय बचपन की कहानी इस घर से साफ बयां हो रही थी। चार कमरों के इस घर में एक कमरे पर ताला लटका हुआ था, जिसमें हवा के प्रवेश को रोकने के लिए प्लास्टिक का कट्टा लगा हुआ है।
अंदर दो छोटे-छोटे कमरे, जिनमें बड़ा बॉक्स रखा है तो यहीं गैलरी में गेहूं के कट्टे हैं। साथ लगते बड़े कमरे या यों कहे हॉल में आज पूरी चहल पहल थी। यहां बुजुर्ग हुक्का गुड़गड़ा रहे थे। बाहर बैठे युवा भी मस्ती में थे।
सभी को अपने खट्टर पर नाज है। इस घर में करीब डेढ़ साल पहले तक उनके भाई गुलशन खट्टर रहते थे लेकिन अब वे रोहतक में बस गए। परिवार के दूसरे लोग ही इस घर की देखरेख कर रहे हैं।
संघर्ष का दूसरा नाम है मनोहर: सावित्री
खुशी इतनी है कि शब्दों में बयान नहीं कर सकती। बुआ हूं उसकी, गोदी में खिलाया है। कहते हुए बूढ़ी आंखें चमक उठती हैं सीएम की बुआ सावित्री देवी की। आज प्रदेश का सीएम बन गया। दिल से सदा आशीर्वाद ही दिया है। उसने अपना सारा जीवन मेहनत और संघर्ष में बिताया है। संघर्ष का दूसरा नाम है मनोहर। वह न तो खाने वाला है और न ही किसी को खाने देगा। वह गरीबों और किसानों का हितैषी है। उसने बचपन खेतों में गुजारा है। कुछ न कुछ तो जरूर करेगा।
गांव का नाम रोशन कर दिया है। इससे बड़ी और खुशी और क्या हो सकती है। आने वाला इतिहास बनियानि गांव को सीएम के गांव के नाम से जानेगा। उसने कभी लिया नहीं हमेशा दिया ही है। अब गांव के लिए भी जो बनेगा वह करेगा। कैसे यहां तक पहुंचे? इस सवाल पर कहती हैं उसने अपने बारे में कभी नहीं सोचा। हमेशा दूसरों के बारे में सोचता है।
भले ही किसी के घर खुशी में नहीं पहुंचे, लेकिन दुख की घड़ी में सबके घर जरूर पहंचता है। यह उसकी बचपन की आदत है। पहले कुछ लोगों की सेवा कर पाता था। अब भगवान ने उसे पूरे प्रदेश की जनता की सेवा का मौका दिया है।