दो दिन पहले तक संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अब सुर बदल गए है।
उन्होंने केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा है कि यह अध्यादेश देश की प्रगति, किसानों की समृद्धि और खुशहाली के लिए है। उन्होंने लोगों से स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे मिथ्या प्रचार से सजग व सावधान रहने को कहा है।
शनिवार को जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश को आगे बढ़ाना है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार के इस अध्यादेश में किसानों के हित में किए गए प्रावधानों का खुलकर समर्थन करें।’
उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश में किए गए प्रावधान किसानों व भूमि मालिकों के हित में हैं। उन्होंने कहा कि यह समझना होगा कि गांवों में पेयजल सुविधाएं शुरू करने, गरीबों के लिए आवास उपलब्ध करवाने और उद्योगों के लिए औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना जरूरी है।
इस अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है कि जिन 13 विभिन्न केंद्रीय अधिनियमों (रेलवे एक्ट 1989, बिजली एक्ट 2003, भूमि अधिग्रहण खनन अधिनियम 1885, दामोदर वैली कार्पोरेशन एक्ट 1948 इत्यादि) के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण अलग से किया जाता था और जिसमें कम मुआवजा राशि दी जाती थी, उसके स्थान पर अब किसानों व भूमि मालिकों को सोलशियम की राशि 30 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अध्यादेश में दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि अधिनियम, 2013 की धारा 113 के अंतर्गत जिन प्रावधानों को लागू करने में जो व्यावहारिक कठिनाइयां थीं, उन्हें दूर करने के लिए दो साल की जगह पांच साल तक केंद्र सरकार आदेश जारी कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यादेश के अन्य प्रावधान के अनुसार, राष्ट्रहित में सरकारों को यह छूट दी गई है कि वह रक्षा परियोजनाओं जैसे प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहण कर सकती हैं। नए नियम के तहत किसान व भूमि मालिकों को पूरा-पूरा मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई यह कहता है कि मुआवजा कम मिलेगा तो वह भ्रामक प्रचार कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कुछ स्वंभू नेता केंद्र सरकार के अध्यादेश के बारे में मिथ्या प्रचार कर रहे हैं। अध्यादेश में जो नए प्रावधान लाए गए हैं उनके लिए कांग्रेस शासित प्रदेशों, जिनमें हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार और महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चौहान की सरकार ने 2013 के कानून में संशोधन की मांग की थी। हुड्डा सरकार ने भी पत्र लिखकर व अधिकारियों को केंद्र सरकार की बैठकों में भेजकर इस एक्ट में संशोधन करने की मांग की थी।