लोक आस्था का महापर्व छठ गुरुवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। व्रती आम के दातून से दांतों की सफाई कर, स्नान करने के बाद नहाय-खाय का प्रसाद (कद्दू की सब्जी, चने की दाल और चावल) सेवन करने के बाद व्रत की शुरुआत की।
छठ को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की ओर से लुधियाना के नजदीक सतलुज दरिया व सिधवां कैनाल पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पंडित रामयज्ञ द्विवेदी ने कहा कि सौम्य एवं स्थिर योग में ये अनुष्ठान संपन्न होगा।
नहाय-खाय के बाद बनेगा खरना का प्रसाद
गुरुवार को नहाय-खाय के बाद व्रती निर्जला उपवास करेंगे। शुक्रवार को खरना का प्रसाद बनेगा। व्रती पूरे दिन उपवास रहकर शाम को दरिया या अन्य नदी-तालाब में स्नान करने के उपरांत ही खरना का प्रसाद खीर और रोटी बनाएंगी।
खरना के प्रसाद में गंगाजल, दूध, गुड़, अरवा चावल का प्रयोग कर मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी से प्रसाद बनाने के बाद भगवान सूर्य को अर्पित करने के बाद ग्रहण किया जाएगा।
भगवान सूर्य की मानस बहन हैं षष्ठी देवी
पंडित रामयज्ञ द्विवेदी ने बताया कि भगवान सूर्य की मानस बहन षष्ठी देवी हैं। षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा जाता है। प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर को सप्तमी तिथि अत्यंत प्रिय है। विष्णु पुराण के अनुसार तिथियों के बंटवारे के समय सूर्य को सप्तमी तिथि प्रदान की गई। ऐसे में उन्हें सप्तमी का स्वामी कहा जाता है। छठ महापर्व खास तौर पर शरीर, मन तथा आत्मा की शुद्धि का पर्व है।