चंडीगढ़। नहाय खाय के साथ बुधवार से चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ हो गया। नहाय खाय के तहत व्रती अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी बनाकर खाती हैं। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के या अन्य लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सुबह और शाम दोनों ही होता है।
शाम को प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती फिर से उपवास पर रहती हैं। व्रती वीरवार की शाम को शाम में खरना का प्रसाद ग्रहण करेंगी। खरना के दौरान भी व्रती पूरा दिन अखंड उपवास रखती हैं। खरना के बाद चांद के डूबने से पहले ही पानी पीते हैं। उसके बाद 36 घंटे से भी अधिक का अखंड उपवास शुरू होता है। पहला अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को देते हैं और दूसरा अर्घ्य उगते सूर्य को प्रदान कर व्रत संपूर्ण होता है। उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने के बाद व्रती पारण करती हैं।
सेक्टर 29 निवासी व्रती प्रमिला देवी ने बताया कि वह हर वर्ष छठ पूजा करती हैं। इस वर्ष भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बार वह भगवान सूर्य से कोरोना से मुक्ति के लिए प्रार्थना करेंगी। उन्होंने बताया कि यह महापर्व चार दिनों का कठिन तप है। इस दौरान पूरे परिवार के साथ छठ के गीत गाए जाते हैं।
सेक्टर 47 निवासी मीरा शर्मा ने बताया कि घर में धर्ममय माहौल हो गया है। इस महापर्व को हम सभी को पूरा एक वर्ष का इंतजार होता है। अब यह समय आ गया है। नहाय खाय से हमारा व्रत शुरू हो गया है। इसका समापन शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान कर हो जाएगा।