करीब सात महीनों के अंतराल के बाद महेंद्र चौधरी प्राणी उद्यान, जिसे छतबीड़ चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता है, 15 अक्तूबर को फिर से खुलने वाला है। चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर एम सुधागर ने कहा कि हम 15 अक्टूबर को फिर से चिड़ियाघर खोलने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हम राज्य सरकार से अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
जू कर्मचारियों को निर्देश हैं कि वे पर्यटकों के बीच सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करें। केंद्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से कोरोना के प्रति निर्धारित सभी सावधानियां अपनाई जाएंगी। हम तय कर रहे हैं कि कितने पर्यटकों को एक बार में अनुमति दी जाए। उन्होंने बताया कि 17 मार्च के बाद से चिड़ियाघर को 3.5 करोड़ का नुकसान हुआ है।
चिड़ियाघर लॉकडाउन से एक दिन पहले 1.8 लाख रुपये कमा रहा था और अगले दो वर्षों में चिड़ियाघर के आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद थी। अब अधिकारियों के मुताबिक इस घाटे से उबरने में चिड़ियाघर को 6 महीने का समय लग सकता है।
लॉकडाउन से कई परियोजनाएं अधर में
पंजाब सरकार ने 4.5 करोड़ से चिड़ियाघर में दो एकड़ में एक डायनासोर पार्क खोलने की योजना बनाई थी लेकिन अब तक केवल 50 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। इसके अलावा एक मछलीघर (एक्वेरियम) स्थापित करने का प्रस्ताव था।
एक विदेशी पशु आयात कार्यक्रम, जिसमें चिड़ियाघर में अफ्रीका से जेब्रा, जिराफ, चिंपाजी और गोरिल्ला सहित विदेशी जानवरों को आयात करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था को भी बीच मे ही रोकना पड़ा है। जू परिसर में कई सुविधाएं जैसे कि एक एवियरी और नए टिकट काउंटर भी जोड़े गए थे, इसके अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नई सड़कें भी बनाई गई थीं।
जानवरों के खाने पर होता है 30 लाख खर्च
फील्ड डायरेक्टर एम सुधागर ने बताया कि चिड़ियाघर में जानवरों के लिए मांस, चारा, अनाज, फल और सब्जियों पर महीने में लगभग 30 लाख खर्च होता है। पार्किंग, कैंटीन और लॉयन सफारी के आउटसोर्सिंग के माध्यम से राजस्व उत्पन्न होता है जोकि महामारी के कारण सब कुछ बंद करना पड़ा था।
चिड़ियाघर एक दिन में लगभग 3,000 पर्यटकों को आकर्षित करता था। टिकटों की कीमत वयस्कों के लिए 80 रुपये और बच्चों के लिए 40 रुपये थी, जिससे 1.8 लाख का दैनिक औसत राजस्व का योगदान होता था। लॉयन और हिरन सफारी टिकटों की कीमत प्रति पर्यटक 75 रुपये है।